वैसे तो पतियों द्वारा पत्नियों की पिटाई के मामले अक्सर सुनने को मिलते हैं, लेकिन राजधानी लखनऊ में ऐसा नहीं है. एक ताजा आंकड़े के मुताबिक पिछले एक साल में करीब साढ़े छह हजार पुरुष भी घरेलू हिंसा के शिकार हुए हैं.

 

19 नवंबर 2017 को यूपी पुलिस की इमरजेंसी सेवा डायल 100 के एक साल पूरे होने पर जारी की गई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. यूपी 100 की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि पिछले एक साल में 6, 646 ने कॉल कर अपने पत्नियों से बचाने की गुहार लगाई. इनमें 40 प्रतिशत पुरुष सरकारी सेवा में थे, जबकि 20 प्रतिशत पत्नियां सरकारी नौकरी में थीं.

 

हालांकि ज्यादातर मामले में पुरुषों की पिटाई शराब पीने की वजह से हुई. जबकि अन्य पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि कभी खाना बनाने तो कभी सफाई करने की बात पर वे पत्नियों के हाथों पीटे गए.

पीड़ितों ने अपनी शिकायत में पुलिस से बताया कि उन्हें कई बार पत्नी ने हाथ के अलावा डंडों और बेल्ट से भी पीटा. उनका कहना था कि खाना बनाने और सफाई की बात न सुनने पर उग्र पत्नियों के हाथों उनकी पिटाई की गई.

 

हालांकि 100 नंबर पर फोन करके पतियों की हिंसा से बचाने की मदद मांगने वाली महिलाओं की संख्या ज्यादा है. पिछले एक साल में 1.53 लाख महिलाएं ने 100 नंबर पर फोन करके पुलिस से मदद मांगी. अधिकारियों की मानें तो हर रोज लगभग 419 फोन 100 नंबर पर महिलाओं के आते हैं.

 

लखनऊ एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि पिछले एक साल में 7 लाख के करीब घरेलू हिंसा की शिकायतें मिलीं. इसमें चौकाने वाली बात यह थी कि ग्रामीण इलाकों से ज्यादा शहरी इलाकों में घरेलू हिंसा के मामले ज्यादा थे. लखनऊ, गोरखपुर, आगरा, कानपुर जैसे टॉप शहर घरेलू हिंसा के मामले में अव्वल रहे.