पद्मावती की एक महान रानी थी। जिन पर कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने एक कविता भी लिखी है। रानी पद्मावती अपनी सुंदरता के लिए पूरे भारत में जानी जाती थी। रानी पद्मिनी के अस्तित्व को लेकर इतिहास में कोई दस्तावेज मौजूद नही है। लेकिन चित्तोड़ में हमें रानी पद्मावती की छाप दिखाई देती है।

 

चित्तौड़गढ़ की रानी पद्मावती को लेकर विवाद पूरे देश में फैल चुका है। सभी धर्म के लोग पद्मावती फिल्म के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन आज भी राजस्थान में उन्हें देवी की तरह पूजा जाता है। असल में राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में बने एक मंदिर में पद्मावती यानी पद्मिनी की प्रतिमा स्थापित है। इस मंदिर में देवी के स्वरूप में रानी का रूप दिखाया गया है। ये मुर्ति उनके जीवन के बारे में प्रतिमा मुखर होकर बोलती नजर आती है।

 

इस मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस मंदिर में सन् 1468 में राणा रायमल ने पद्मावती की मूर्ति की स्थापना करवाई थी। खुद चंद्रशेखर का परिवार 7 पीढ़ियों से इस मंदिर की पूजा कर रहा है।

 

इसमें भगवान पाश्वनाथ और महादेव की मूर्ति भी स्थापित है। पुजारी चंद्रशेखर ने बताया कि मंदिर में बने गो मुख से 24 घंटे पानी गिरता है। जिसे उन्होंने कभी बंद होते नहीं देखा।

 

इस मंदिर में ब्राह्मण समाज के लोग पूजा करने आते हैं।

 

मूर्ति में क्या है खास

पुजारी चंद्रशेखर ने बताया कि इस मंदिर में पद्मावती की जो मूर्ति लगी है। उसमें मूर्ति बनाने वाले ने पद्मावती को कल्पना करते दिखाया गया है। चंद्रशेखर के अनुसार हाथ में आईना लिए मूर्ति ये सोच रही है कि किसी को इतना भी सुंदर मत बनाना कि उसकी वजह से राज्य तबाह हो जाए।

 

महल से सीधी आती थी सुरंग

पुजारी चंद्रशेखर ने बताया कि इस मंदिर में 1.5 किलोमीटर की एक सुरंग भी है। जो रानी पद्मावती के पद्मिनी महल से सीधे इस मंदिर में पहुंचती है। जिसे फिलहाल बंद कर दिया गया है।

 

कहा जाता है कि रानी पद्मावती सुबह स्नान के बाद सुरंग के जरिए सीधे इस मंदिर में पूजा करने पहुंचती थीं। सुरंग को खास इसलिए बनाया गया था जिससे कोई पद्मावती को आते-जाते ना देख सके।