राम मंदिर मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पर हमलावर हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह समेत कई नेताओं के निशाने पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी हैं. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने शायराना अंदाज में वार किया है.

 

संबित ने राहुल पर वार करते हुए कहा कि 'बदलते हुए मौसम का परवाना हूं मैं, गुजरात में जनेऊधारी हिंदू हूं तो यूपी-बिहार में मौलाना हूं मैं''.

 

बीजेपी प्रवक्ता ने कपिल सिब्बल को भी घेरा. उन्होंने कहा कि आज हाजी महबूब के बयान के बाद बड़ा ख़ुलासा हुआ है कि कपिल सिब्बल से सुनवाई से पहले बाबरी मस्जिद मामले में इनकी मुलाक़ात हुई थी तब मामले को टालने की बात कोर्ट में कही जाए इस पर कोई बात नहीं हुई थी.

 

उन्होंने कहा कि इसका मतलब साफ है कपिल सिब्बल कोर्ट में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी या सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की तरफ़ से नहीं बल्कि कांग्रेस वोट बोर्ड की तरफ से पेश हुए थे. संबित ने कहा कि कपिल सिब्बल ने कोर्ट में जो राम मंदिर मामले को 2019 के चुनाव के बाद सुनवाई करने की बात कही थी वो सोनिया गांधी और राहुल गांधी के कहने पर ही कही थी.

 

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि कपिल सिब्बल को ये बात समझ में आनी चाहिए कि कोर्ट सबसे ऊपर है उसको कोई गाइड नहीं कर सकता है चाहे वह सोनिया गांधी हो या राहुल गांधी. कोर्ट ने अगर ये फ़ैसला लिया है कि राम मंदिर मामले की सुनवाई हर रोज होगी तो उसको कोई चैलेंज नहीं कर सकता है.

 

PM मोदी के बयान पर उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने सही कहा है कि वो चुनाव और वोट बैंक को ध्यान में रखकर फैसले नहीं लेते हैं. ट्रिपल तलाक़ पर सरकार के फैसले का सभी धर्मों की महिलाओं ने स्वागत किया था, पीएम के इस फ़ैसले से सभी को सुरक्षा मिली है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी मंदिर जाए इसमें किसी को आपत्ति नहीं है लेकिन वो राम मंदिर पर भी अपना रुख साफ करें.

 

राम मंदिर पर क्या बोले मोदी

 

आपको बता दें कि मंगलवार को प्रधानमंत्री ने धांधुका में रैली को संबोधित किया. यहां उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे पर कहा कि चुनाव के बीच अब कांग्रेस भी खुद को राम मंदिर से जोड़ रही है, लेकिन उन्हें राष्ट्र की चिंता नहीं है.

 

सुप्रीम कोर्ट में मंदिर मसले की सुनवाई पर पीएम मोदी ने कहा कि कल कपिल सिब्बल बाबरी मस्जिद के पक्षकारों की तरफ से बोल रहे थे, यह उनका काम है, इससे शिकायत नहीं है. लेकिन क्या उन्हें 2019 तक सुनवाई टालने की मांग करनी चाहिए, क्या कांग्रेस की ओर से राम मंदिर मुद्दे को चुनाव तक टालने की कोशिश की जा रही है.