गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले दौर में 89 सीटों पर हुए मतदान के बाद ये कहना मुश्किल हो रहा है कि किसी एक राजनीतिक दल के पक्ष में कोई सियासी लहर या माहौल है, बल्कि बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला नजर आ रहा है. राज्य के जिन इलाकों में पहले दौर के मतदान हुए, वहां के अलग-अलग क्षेत्रों से अलग-अलग खबरें आ रही हैं. शहरी क्षेत्र की तस्वीर कुछ बयां कर रही हैं, तो ग्रामीण इलाकों की कुछ और.

 

इस बार चुनावी तस्वीर साफ नहीं हैं. यही वजह है है कि पहले दौर के बाद बीजेपी-कांग्रेस असमंजस में नजर आ रहे हैं, लेकिन दोनों सियासी दल जुबान से बढ़त का दावा कर रहे हैं, ताकि दूसरे चरण में चुनावी माहौल अपने पक्ष में बना सकें.

 

गुजरात विधानसभा चुनाव में पहले चरण के मतदान के बाद राजनीतिक पंडितों के बीच नतीजों को लेकर बहस जारी है. बीजेपी भले ही सत्ता में वापसी की संभावना जता रही है, लेकिन कांग्रेस की हालत पहले से मजबूत है, इस बात पर कई राजनीतिक पंडित पूरी तरह सहमत हैं.

 

पिछली बार से 4 फीसदी कम हुआ मतदान

 

बता दें कि गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले दौर में शनिवार को सौराष्ट्र-कच्छ और दक्षिण गुजरात के 19 जिलों की 89 सीटों पर मतदान हुए. राज्य की बाकी बची 93 सीटों पर 14 दिसंबर को दूसरे चरण में वोटिंग होगी. चुनाव आयोग के मुताबिक पहले चरण में 68 फीसदी वोटिंग हुई. जबकि 2012 के पिछले विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर करीब 72 फीसदी मतदान हुए थे. इस तरह देखा जाए तो करीब 4 फीसदी मतदान कम हुए हैं.  

 

सौराष्ट्र-कच्छ का बदला नजारा

 

गुजरात की सियासत में सौराष्ट्र क्षेत्र काफी अहमियत रखता है. सौराष्ट्र-कच्छ में करीब 54 सीटें आती हैं. ये पूरा क्षेत्र पाटीदार बाहुल्य माना जाता है. बीजेपी का ये मजबूत गढ़ रहा है. बीजेपी इसी दुर्ग के सहारे पिछले दो दशक से सत्ता के सिंहासन तक पहुंचती रही है. लेकिन इस बार पहले दौर के हुए मतदान ने बीजेपी को बेचैन कर दिया है. सौराष्ट्र की सभी जिलों में मतदान पिछली बार की तुलना में कम हुए.

 

सौराष्ट्र क्षेत्र में शनिवार को हुए मतदान का पूरा औसत निकालते हैं तो वो करीब 64 फीसदी के करीब पहुंचता है. जबकि पिछली बार इस इलाके में 70 फीसदी के करीब वोटिंग हुई थी.

 

'बीजेपी के खिलाफ वो गुस्सा नजर नहीं आया'

 

गुजरात सेंट्रल युनिवर्सिटी के प्रोफेसर जय प्रकाश प्रधान कहते हैं कि बीजेपी से पाटीदार समाज नाराज माने जा रहे हैं. ऐसे में लग रहा था कि सौराष्ट्र में पाटीदार बढ़कर चढ़कर बीजेपी के खिलाफ वोटिंग करेंगे. जिस प्रकार 2015 के जिला पंचायत के चुनाव में किया था और बीजेपी का सफाया कर दिया था.

 

सौराष्ट्र की 11 जिला पंचायत सीटों में से बीजेपी के खाते में महज एक सीट गई थी बाकी 10 सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. विधानसभा के चुनाव के मतदान में बीजेपी के खिलाफ वो गुस्सा नजर नहीं आया.

 

गुजरात के राजनीतिक विश्लेषण और समाजिक कार्यकर्ता आशिम रॉय कहते हैं कि सौराष्ट्र में बीजेपी के लिए इस बार पहले जैसे नतीजे दोहराना मुश्किल नजर आ रहा है. पाटीदार वोट जिस प्रकार बीजेपी के पक्ष में एकमुश्त जाते थे वो इस बार के चुनाव में नहीं हुआ.

 

कांग्रेस के पक्ष में सौराष्ट्र के पाटीदारों का एक बड़ा तबका था, जबकि 2012 के विधानसभा चुनाव में सौराष्ट्र से बीजेपी ने दो तिहाई से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार कांग्रेस को पहले से ज्यादा सीटें मिलने की संभावना है. उनका कहना है कि ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस के पक्ष में मतदान हुए हैं, तो शहरी क्षेत्र में बीजेपी.

 

 

दक्षिण गुजरात का फैसला आदिवासियों के हाथ में

 

दक्षिण गुजरात की करीब 35 सीटों पर शनिवार को मतदान हुए. सौराष्ट्र की तरह दक्षिण गुजरात में किसी एक जाति का वर्चस्व नहीं है. इस क्षेत्र में कमोबेश सभी जातियां हैं, लेकिन इस क्षेत्र की कई विधानसभा सीटें हैं जहां आदिवासी समाज अहम भूमिका अदा करते हैं. दक्षिण गुजरात के नर्मदा, भरूच, डैंग, तापी और बलसाठ जिले ऐसे हैं, जहां आदिवासी बाहुल्य है.

 

 

कांग्रेस के पक्ष में आदिवासी

 

इन जिलों में भरूच और टापी में पिछले चुनाव के मुताबिक कम मतदान हुए हैं, लेकिन दक्षिण गुजरात के बाकी जिलों में बड़ी तादात में वोटिंग हुई है. जय प्रकाश प्रधान कहते हैं कि दक्षिण गुजरात में छोटू भाई वसावा से कांग्रेस की दोस्ती बीजेपी के लिए मुसीबत का सबब साबित हो सकती है. आदिवासियों का बड़ा तबका कांग्रेस के पक्ष में दिखा.

 

 

ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त वोटिंग

 

आशिम रॉय कहते हैं कि दक्षिण गुजरात में किसान और व्यापारियों की बड़ी तादाद है, किसानों में मौजूदा सरकार के खिलाफ गुस्सा है तो व्यापारी भी विरोध में हैं. बीजेपी व्यापारियों को मनाने में बहुत हद तक कामयाब रही है, लेकिन किसानों के गुस्से को वो कम नहीं कर सकी है. इसीलिए व्यापारियों का बड़ा तबका बीजेपी के संग कल दिखा तो वहीं किसान कांग्रेस के पक्ष में थे. इसीलिए ग्रामीण इलाकों में बड़ी तादाद में वोटिंग हुई है.

 

असमंजस के बीच बीजेपी-कांग्रेस के दावे

 

गुजरात चुनाव के पहले दौर के मतदान के बाद बीजेपी और कांग्रेस असमंजस में हैं. इसके बावजूद दोनों दलों की ओर से जुबानी बढ़त के दावे किए जा रहे हैं. ताकी बाकी बची 93 विधानसभा सीटों का माहौल उनके पक्ष में बन सके. दूसरे चरण में उत्तर गुजरात और सेंट्रल गुजरात के क्षेत्र में मतदान होने हैं. बीजेपी का दावा है कि उसे 120 सीटों से अधिक पर जीत मिलने जा रही है. वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ताल ठोककर 150 सीटों पर जीत की बात कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस से अहमद पटेल भी 110 सीटों पर जीत देख रहे हैं.