कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह नर्मदा परिक्रमा के दौरान रास्ता भटक गए. इस परिक्रमा के दौरान उनके साथ पैदल ही रास्ता तय कर रही पत्नी अमृता राय सिंह ने फेसबुक पर इस दिलचस्प किस्से का खुलासा किया है.

 

दरअसल, दिग्विजय सिंह और अमृता राय की नर्मदा यात्रा 1000 से ज्यादा किलोमीटर का सफर तय कर गुजरात में प्रवेश कर चुकी है. रविवार को नर्मदा यात्रा में शामिल सभी लोग रास्ता भटक गए. उन्होंने करीब साढ़े सात किलोमीटर का गलत रास्ता तय कर लिया. इस दौरान स्थानीय लोगों से हुई मुलाकात के अनुभव को अमृता ने फेसबुक पर शेयर किया हैं.

 

अमृता की फेसबुक पोस्ट में किसानों का दर्द था, तो ग्रामीण गुजरात के हालत बयां करती लड़कियों का दर्द भी. इशारों-इशारों में अमृता ने गुजरात के ग्रामीणों को आ रही मुश्किलों का जिक्र कर दिया. साथ ही पोस्ट के अंत में लिखा, 'लेकिन कल का भटकना सुखद रहा'.

 

कल नर्मदा किनारे हम राह भटक गए. और तुअर के खेतों से ढूंढ़ते हुए पहुंच गए दत्तू भाई के गांव सुरासामल. वहां पहुंचकर देखा तो करीब साढ़े सात किलोमीटर तक चल चुके थे. सो हम सुस्ताने की जगह तलाशने लगे. तभी सामने आए सरदार खां राठौर. उनसे ही पता चला कि गांव में पटेल और मुसलमानों की लगभग बराबर की संख्या है. राठौर साहब का ठौर मिला तो हम बैठ भी गएं हमने पहचान शुरू ही की थी कि पीछे से चेतना नाम की लड़की चाय लेकर आ गई.

 

चेतना ने केवल सातवीं तक पढ़ाई की थी. बताया कि आगे स्कूल के लिए गांव से दूर जाना पड़ता है सो वो बाहर नहीं जा सकी और पढ़ाई छूट गई. अब शादी होने का इंतज़ार है. फिर राठौर साहब के घर से भी चाय की ट्रे आ गई. चाय में पूरे भाईचारे का संदेश पाकर अच्छा लगा.

 

उन्होंने हमें थका देखकर वहीं रात बिताने का न्यौता भी दिया लेकिन हमारी मंज़िल मालसर में थी सो हम चल दिए. आगे बढ़े तो दो मौसेरे भाई मिले. दत्तू भाई और लक्ष्मीदास भुवनभाई पटेल. उन्होंने कहा अब आगे का रास्ता हम आपको बताएंगे. हमें अच्छा लगा कि कम से कम अब हम सही राह पर चल सकेंगे. तभी दोनों भाई खेती किसानी पर बात करते करते कहने लगे- खेडुत कंटाली गया छै.

 

भाषा नई थी सो कई बार समझाने पर पता चला कि वो ये कह रहे हैं कि किसानी में बड़ी समस्या आ गई है. उपज तो है पर भाव नहीं मिल रहे.

 

कुछ मायूसी के साथ बताते रहे कि गुजरात संदेश में पढ़ा था कि सरकार कपास में 500 रुपये बोनस सब्सिडी देगी. लेकिन दो महीने हो गए बेचने का भी पैसा नहीं मिला. भाव भी गए साल 5000 रुपये था इस साल 4300 में ही बिका. दोनों भाई कंटाली की व्याख्या करते करते स्थानीय विधायक, उनकी राजनीति सब बता गए.

 

फिर बताया कि हम दोनों ही अविवाहित हैं. सो मैंने उनसे परिवार पर ज्यादा बात करना उचित ना समझा और आगे बढ़ गए. लेकिन कल का भटकना सुखद रहा.