हमारे समाज की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि हमारे अस्तित्व से जुड़े सबसे जरूरी विषय सेक्स के बारे में बात करना यहां गलत माना जाता है। ऑर्गज्म से लेकर सेक्स पेन तक यहां हैं ऐसे ही कई सवालों के जवाब...

जवाब: महिला का ऑर्गज्म पुरुषों की तुलना में थोड़ा जटिल होता है। महिलाएं पुरुषों की तरह इजैकुलेट (हालांकि पुरुषों में भी इजैकुलेशन का हर बार मतलब ऑर्गज्म नहीं होता) नहीं कर सकतीं। साथ ही हर औरत अलग तरह से ऑर्गज्म अनुभव करती है और हर ऑर्गज्म भी अलग होता है। कुछ में आपको चक्कर आ सकता है, कुछ में आपके पैरों में हल्कापन लग सकता है वहीं कुछ मीठी राहत भरा। हालांकि ऑर्गज्म के अनुभव को बताने का सबसे अच्छा तरीका है कि इसके बाद आपको संपूर्णता का अनुभव हुआ या नहीं। आपकी हार्ट बीट बढ़ जाती है, आंखों की पुतली फैल जाती है, आपकी सांसें भारी हो जाती हैं और कुछ देर के लिए आप पूरी तरह संतुष्ट महसूस करती हैं।

जवाब: कुछ सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शंस ऑरल सेक्स से भी हो सकते हैं। एसटीआई के लक्षण दिखाई नहीं पड़ते इसलिए टेस्ट करवाते रहना जरूरी है। लेकिन ऑरल सेक्स से हुआ संक्रमण आसानी से ठीक हो जाता है।

जवाब: पहली बार सेक्स करने पर ब्लीडिंग हाइमन के फटने से होती है। लेकिन जरूरी नहीं है कि हर वर्जिन लड़की को ब्लीडिंग हो। कई बार हाइमन फिजिकल ऐक्टिविटी से भी ब्रेक हो जाता है।

जवाब: नहीं, यह नॉर्मल नहीं है। दर्द इसलिए भी हो सकता है क्योंकि आपने ठीक से लूब्रिकेट नहीं किया है। किसी अच्छे लूब्रिकेंट में पैसे खर्च करें। अगर फिर भी दर्द होता हो तो किसी अच्छी महिला रोग विशेषज्ञ से बात करें।

जवाब: सेक्स अगर आराम से किया जाए और लूब्रिकेंट का इस्तेमाल ठीक से किया जाए तो सुई चुभने जैसा दर्द होता है। वैसे सेक्स दर्दनाक नहीं होता है, न पहली बार और न ही कभी। अगर दर्द होता है तो अपने पार्टनर से बात करें या फिर डॉक्टर से मिलें।