नई दिल्ली गुजरात चुनाव में पाकिस्तान, ताइवान के बाद अब चीन का नाम भी आ रहा है लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है। दरअसल, चीनी मीडिया की खबरों के मुताबिक चीन के ऑब्जर्वर्स गुजरात चुनाव के नतीजों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि वे इसको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुधारवादी अजेंडा को लेकर भारतीयों के रुख का लिटमस टेस्ट मान रहे हैं। 

चीन के सरकार 'ग्लोबल टाइम्स' के मुताबिक, चीन और भारत के बीच आर्थिक भागीदारी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत की अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलाव चीन के लिए गहरी चिंता का विषय है। 


लेख के मुताबिक, 'मोदी के आर्थिक सुधारों का देश की अन्य पार्टियों और कुछ अर्थशास्त्रियों ने जमकर विरोध किया। देश में विकास को आंकने के लिए गुजरात मॉडल का उदाहरण दिया गया। चुनाव के नतीजे कुछ भी हों, उसका पीएम मोदी के अन्य सुधारवादी अजेंडा को लेकर लोगों की राय पर बहुत असर पड़ेगा।' 


आर्टिकल में गुजरात चुनावों में बीजेपी की हार को अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों के लिए बहुत बड़ा झटका बताया गया है। यहां तक कि लेख में यह भी कहा गया है कि अगर बीजेपी जीतती है लेकिन उसका वोट शेयर घटे, तो भी यह बीजेपी के लिए खतरे की घंटी है। 


लेख के मुताबिक, 'अगर बीजेपी जीत जाती है लेकिन उसके वोट शेयर में कमी आए तो यह मानना चाहिए कि भारत में हो रहे सुधारों पर संकट के बादल हैं। बीजेपी की हार भारत के आर्थिक सुधारों में कमियों को दिखाएगी। इसका मतलब होगा कि लोगों के मन में अब भी दुविधा की स्थिति है कि ये सुधार देश के छोटे व्यापारियों और साधारण लोगों को पर्याप्त फायदा पहुंचाएंगे। सरकार को ऐसे रास्ते खोजने चाहिए जिससे सुधारों को आम नागरिकों का समर्थन मिले।' 


आर्टिकल में कहा गया है, 'जो कंपनियां भारत में काम कर रही हैं उन्हें चुनाव नतीजों के बाद आर्थिक नीतियों में संभावित बदलावों के लिए तैयार रहना चाहिए।'