नई दिल्लीः राज्यसभा में आज शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन गुजरात चुनाव के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ की गई टिप्पणी सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण बैठक को तीन बार के स्थगन के बाद दोपहर करीब तीन बजे पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्षी सदस्य पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ टिप्पणी करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी मांगने की मांग कर रहे थे। वहीं उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने आज पहली बार राज्यसभा के सभापति का पद संभालते हुए पहले ही दिन कुछ बदलाव के सुझाव दिए।


उन्होंने सभी मंत्रियों और सांसदों से कहा कि सदन पटल पर किसी भी कागजात या रिपोर्ट को पेश करते समय औपनिवेशिक काल के शब्दों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। दरअसल आज शीतकालीन सत्र के पहले दिन नायडू ने कहा कि वे सदन को एक सुझाव देना चाहते हैं कि दस्तावेज रखते समय किसी को भी इन शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, 'मैं विनती करता हूं।' उन्होंने कहा, 'बस यही कहिए कि मैं दस्तावेज सदन के पटल पर रखने के लिए खड़ा हुआ हूं।'


उन्होंने कहा कि यह स्वतंत्र भारत है, यहां 'विनती करने की जरूरत नहीं...। यह मेरा सुझाव है, आदेश नहीं।' इतना ही नहीं नायडू ने दिवंगत पूर्व सदस्यों के योगदान का उल्लेख अपनी जगह पर खड़े होकर किया। इससे पूर्व उनके पूर्ववर्ती हामिद अंसारी और भैरों सिंह शेखावत पूर्व सदस्यों के उल्लेखों को अपनी सीट पर बैठकर पढ़ते थे। हालांकि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी अपने स्थान पर खड़े होकर श्रद्धांजलि उल्लेख पढ़ती हैं। बता दें कि नायडू इसी साल अगस्त में भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति बने हैं।