महाराष्ट्र में शिवसेना-बीजेपी में नफरत और प्यार का रिश्ता कई सालों से चला आ रहा है, लेकिन अब
शिवसेना के राजकुमार और युवा सेना प्रमुख आदित्य ठाकरे ने तो डेडलाइन ही तय कर दी है. आदित्य का कहना है कि अगले साल तक शिवसेना सरकार से निकल जाएगी. ये अलग बात है कि बीजेपी के नेता इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. सरकार के मंत्री गिरीश बापट का कहना है कि ऐसा तो वो कई बार कह चुके हैं.

जाहिर है आदित्य ठाकरे को अब साबित करना होगा कि उन्होंने जो कहा है वह करेंगे. दरअसल ये बात इसलिए हो रही है, क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव से शिवसेना और बीजेपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा और चुनाव में बीजेपी नंबर वन पार्टी हो गई. बीजेपी को 123 और शिवसेना को बस 62 सीट मिली, तब से बीजेपी बड़े भाई की भूमिका में है, जो शिवसेना को संभवत: पच नहीं रहा.

इससे पहले शिवसेना ही महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े भाई की भूमिका निभाती रही थी, लेकिन मातोश्री नाम के बंगले में बंद शिवसेना नेताओं को अब भी लगता है कि वो बड़े भाई हैं और बीजेपी को उनकी हर बात माननी होगी, लेकिन बीजेपी ऐसा करने तैयार नहीं है. महानगरपालिका चुनावों में भी बीजेपी ने अपनी ताकत दिखा दी. 10 में से 8 सीटों पर बीजेपी आई और शिवसेना को मुंबई में भी बीजेपी से बस दो कॉरपोरेट ही ज्यादा मिले.


ये सब शिवसेना को खल रहा है, तभी तो उसके नेता हर रोज सुबह उठकर पार्टी के मुखपत्र में बीजेपी के खिलाफ बोलते हैं. यहां तक कि राहुल गांधी की तारीफ भी कर रहे हैं. मगर मुश्किल ये है कि अगर बीजेपी ने साथ छोड़ दिया तो शिवसेना कहां जाएगी.

उद्धव ठाकरे अब तक चार बार डेडलाइन तय कर चुके हैं. उद्धव तो यहां तक कह चुके हैं कि उनके मंत्री जेब में इस्तीफा लेकर घूमते हैं, लेकिन असल में देते नहीं हैं.

दरअसल मंत्रियों को भी मालूम है कि सत्ता से हटे तो कोई नहीं पूछेगा. इसलिए जब भी उद्धव ठाकरे सरकार से हटने के लिए विधायकों और मंत्रियों की बैठक बुलाते हैं, इस पर कोई फैसला नहीं हो पाता है. अब आदित्य ठाकरे ने धमकी दी है, तो संजय राउत और मनीषा कायंदे जैसी प्रवक्ता खुलकर कह रही है कि बीजेपी से रिश्ते अच्छे नहीं है, इसलिए कुछ सोचना होगा.

मुश्किल ये है कि आदित्य ने एक साल का वक्त तय किया, जबकि बीजेपी की प्लानिंग दिंसबर 2018 में ही
विधानसभा चुनाव कराने की है. फिर सरकार का आखिरी साल होगा तो कोई सरकार गिराना भी नहीं चाहेगा. जाहिर है बाजी शिवसेना के हाथ से निकल गई है और अब बस वो लकीर पीट रही है. इससे बेहतर है कि वो तय कर ले कि करना क्या है? ऐसा न हो कि दो नावों की सवारी मे संतुलन भी बिगड़ जाए?