प्याज की कीमतें फिलहाल सातवें आसमान पर है। दिसंबर महीने में भी प्याज की कीमत 48-60 रूपए प्रतिकिलो है। दिसंबर 2016 से लेकर दिसंबर 2017 के बीच प्याज की कीमत में 220 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आपको बता दें कि दिसंबर 2016 में प्याज के भाव 15 रूपए प्रतिकिलो थे। प्याज का मौजूदा थोक भाव 3300 रुपए प्रति क्विंटल है, ऐसे में उपभोक्ताओं के पास महंगी प्याज खरीदने के सिवाय कोई विकल्प नहीं दिखाई दे रहा है।


दिसंबर 2016 में एक किलों टमाटर की कीमत 8 रूपए थी, अब इसकी कीमत 26-30 रूपए प्रतिकिलो है। जबकि गाजर के भाव भी 16 रूपए प्रतिकिलो से बढ़कर 50 रूपए प्रतिकिलो हो चुका है। गृहणियों का कहना है कि प्याज और टमाटर के बिना सब्जी का कोई मतलब नहीं बनता, ऐसे में हम महंगे दामों पर यह सब्जियां खरीदने को मजबूर हैं।


प्याज के दामों में तेजी के कारण

तेलंगाना राज्य के कृषि विपणन विभाग के अधिकारियों के अनुसार गुजरात,मध्य प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश के कारण के चलते प्याज की कीमतों असमान्य वृद्धि हुई है, यही नहीं जनवरी के अंत तक प्याज की कीमतों में कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिलने वाला है। हां, फरवरी में प्याज की कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है।


सितंबर और अक्टूबर महीने में देर से आई बारिश के चलते तेलंगाना में प्याज की फसल को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में अब केवल महाराष्ट्र से सप्लाई की जा रही है। ना सिर्फ प्याज बल्कि अन्य सब्जियों जैसे टमाटर, गोभी, गाजर की कीमतें भी अपने चरम है। पिछली सर्दियों के मुकाबले इन सब्जियों के दामों में भी 200 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।


प्याज की बढ़ती हुई कीमतों के पीछे सट्टेबाजों और मुनाफाखोरों की कारस्तानी भी शामिल है। केन्द्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय ने मंगलवार को सभी राज्यों तथा संघ शासित प्रदेशों के प्याज करोबारियों पर स्टॉक लिमिट रखने के निर्देश जारी किए। ऐसे में यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि कारोबारियों द्वारा लिमिट स्टॉक रखने से प्याज की कीमतों कुछ कमी देखी जा सकती है।


नवंबर महीने में खुदरा महंगाई 16 महीने के सबसे उच्चे स्तर 4.88 फीसदी पर पहुंच चुकी है। सब्जियों की बढ़ती कीमतें तथा ईंधन के दामों में इजाफा इस खुदरा महंगाई की सबसे बड़ी वजह है। नवंबर में सब्जियों के दाम एक साल पहले की तुलना में 22.48 प्रतिशत बढ़े हैं। हांलाकि पिछले साल नवंबर में सब्जियों की कीमतों में 10 फीसदी की गिरावट देखने को मिली थी। आप को जानकारी के लिए बता दें नवंबर में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 4.41 फीसदी हो गई, जबकि अक्टूबर में यही आंकड़ा 2.26 फीसदी था। दालों को छोड़कर सभी सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी जारी है।