मध्य प्रदेश में सागर जिले के एक सेवानिवृत्त अस्सिटेंट प्रोफेसर ने स्किल इंडिया का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है.


डॉ हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि के सेवानिवृत्त अस्सिटेंट प्रोफेसर डॉ अजय शंकर मिश्रा ने अपने घर में सोलर पैनल स्थापित किया है. डॉ मिश्रा ने स्मार्ट तरीके से सोलर पैनल के ऑनलाइन पुर्जे खरीदे, जो शासन द्वारा मिलने वाले अनुदान से भी सस्ते मिले हैं.


डॉ मिश्रा के सिस्टम की कीमत बाज़ार में करीब 20 हज़ार रुपये ज्यादा है. खास बात यह है कि बिजली के उपयोग पर .0.06 % co2 उत्सर्जित होती है. वह सोलर पैनल के उपयोग से समाप्त हो जाएगी.


डॉ मिश्रा का दावा है कि वह प्रतिमाह अपना करीब 8 हज़ार रुपये का बिजली बिल तो बचाते हैं, साथ ही वे बिजली कंपनी को भी प्रतिदिन बिजली बेंचेंगे. उनका कहना है कि सोलर आधारित बिजली का उपयोग कर अगर एक किलो वाट बिजली को बचाते हैं तो इसका मतलब यह होगा कि हम 550 ग्राम कार्बनडाई ऑक्साइड को वायुमण्डल में जाने से बचा लेते है.

प्रो. तिवारी के इस हुनर से जहां बिजली की बजत होगी वहीं वायुमण्डल में भी जहरीले प्रभाव को भी मुक्ति मिलेगी.