नई दिल्ली राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों का नाम तय करने को लेकर होने वाली आम आदमी पार्टी की पार्लियामेंट्री अफेयर्स कमिटी की मीटिंग केजरीवाल के आवास पर शुरू हो गई है. बैठक के लिए पार्टी ने अपने तीन प्रमुख नेताओं को नहीं बुलाया है. इनमें कुमार विश्वास के साथ आशुतोष और संजय सिंह भी हैं.


बुधवार की सुबह आम आदमी पार्टी की पार्लियामेंट्री अफेयर्स कमिटी की मीटिंग के लिए भी कुमार विश्वास नहीं पहुंचे. जानकारी के मुताबिक कुमार विश्वास को मीटिंग के लिए बुलाया भी नहीं गया है.


दूसरी ओर पार्टी ने कुमार विश्वास को ये भी नहीं बताया है कि अगर उन्हें नहीं भेजा जाएगा तो उनकी जगह किसे राज्यसभा भेजा जाएगा.


केजरीवाल के सामने राज्यसभा के चेहरे चुनने की चुनौती


अंडमान से नए साल की छुट्टी मनाकर दिल्ली लौटे आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के सामने राज्यसभा के तीन चेहरे तय करने की सबसे बड़ी चुनौती है. पार्टी के अंदर और बाहर कई नामों को लेकर चर्चा जोर पकड़ते जा रही है. इस बीच मनीष सिसोदिया के सबसे पुराने मित्र कुमार विश्वास को भले नजरअंदाज किया जा रहा हो, लेकिन उन्हें सोशल मीडिया पर कई जानेमाने चेहरों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है.


विश्वास को मिला जाने-माने चेहरों का साथ


इतिहासकार इरफान हबीब ने कुमार विश्वास को संस्थापक सदस्य और कुशल वक्ता बताते हुए उनका नाम राज्यसभा उम्मीदवार की संभावित सूची में ना होने पर हैरानी जताई है. एस इरफान हबीब ने ट्विटर पर लिखा, 'राज्यसभा चुनाव के लिए कुमार विश्वास को आम आदमी पार्टी क्यों दरकिनार कर रही है? वे संस्थापक सदस्यों में से एक और मुखर हैं. चर्चा में आए दो अनजान नामों पर यदि सहमति बनती है, तो यह विनाशकारी हो सकता है.'


इसके अलावा रंगमंच के जाने माने चेहरे और अन्ना आंदोलन के वक्त मंच पर नजर आने वाले अरविंद गौड़ ने भी कुमार विश्वास को राज्यसभा के लिए ना चुने जाने पर सवाल खड़े किए हैं. अरविंद गौड़ ने ट्वीट किया, 'भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन IAC के पहले दिन से कुमार विश्वास जैसा मुखर वक्ता, साहसी योद्धा और शानदार दोस्त आम आदमी पार्टी की ताकत है. निजी नाराजगी या कुंठा में उन्हें राज्यसभा ना भेजना बेहद गलत होगा. अंहकार को आनेवाला कल नहीं दिख रहा क्या?'


गुजरात के चर्चित पटेल समुदाय के नेता हार्दिक पटेल भी कुमार के समर्थन में आ गए हैं. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'संसद में अगर कोई एक आदमी फर्जी राष्ट्रवादियों को चुप करा सकता है, तो वो डॉ. कुमार विश्वास हैं. पर पता नहीं आम आदमी पार्टी में किसे उनके कद से असुरक्षा है कि पार्टी और मौका दोनों को खत्म करने पर तुले हैं?'


हालांकि दिलचस्प बात यह है कि राज्यसभा के टिकट का दावेदार खुद को बता चुके कुमार विश्वास फिलहाल पूरी तरह शांत हैं. कुमार किसी तरह की राजनीतिक टिप्पणी भी नहीं कर रहे हैं. दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल कैंप और आम आदमी पार्टी के सामने कुमार विश्वास को राज्यसभा ना भेजे जाने का कोई ठोस कारण भी नहीं नजर आ रहा है.