वर्तमान में अधिक से अधिक लोग वास्तु की प्रभाविकता और कार्य कुशलता को समझते हैं और इसे चुन रहे हैं। सभी वास्तु को महत्व देने लगे हैं लेकिन उसका कैसे पालन किया जाना चाहिए इसका उन्हें ध्यान कम रह पाता है। दुकानों के नियमों का यदि पालन किया जाए तो उससे आपको लाभ निश्चित ही प्राप्त होंगे। 



किसी भी दुकान के लिए मशहूर होने और सफलता हासिल करने के लिए अच्छा प्रबंधन और ग्राहकों को अच्छी सेवाएं प्रदान करने जैसे दो तत्व ही पर्याप्त नहीं हैं। उचित निर्माण और बहुमूल्य वस्तुओं और दुकान के फर्नीचर की उचित व्यवस्था होने भी अनिवार्य है। दुकानों के लिए वास्तु शास्त्र, वहां के वास्तु को अनुरूप बना देता है जिससे दुकान में संपदा का प्रवाह सुगम हो जाता है और ग्राहकों का अनुभव समृद्ध हो जाता है। दुकानों के लिए वास्तु द्वारा इससे संबंधित दोषों को दूर किया जाता है 



दुकानों के लिए वास्तु से संबंधित कुछ विशेष सिद्धांत हैं जो कि घरों के लिए वास्तु से भिन्न हैं। वास्तु विशेषज्ञ दिशा, अभिमुखन, नकदी काउंटर और अन्य सामग्रियों की स्थिति के आधार पर अवसंरचना में परिवर्तन करते हैं। वास्तु सवंर्धन सामग्रियां भी उपलब्ध हैं जो कि कुप्रभावों को दूर करती हैं और कारोबार में समृद्धि का वास होता है। 



दुकानों के लिए वास्तु के लिए कुछ सामान्य वास्तु टिप्सः-


-दुकान के मालिक की सीट उसकी पसंदीदा दिशा में होनी चाहिए।


-दुकान या शोरूम का पसंदीदा आंतरिक प्लॉट आयताकार या वर्गाकार होना चाहिए।


-दुकान का मुख्य प्रवेश द्वार में कोई शोर नहीं होना चाहिए तथा उसके आसपास सामान का ढेर नहीं होना चाहिए।


-धन के लिए वास्तु शास्त्र के आधार पर नकदी काउंटर और देवी देवताओं की मूर्तियों को रखा जाना चाहिए।


-अपनी दुकान को धूल मिट्टी से रहित रखें ताकि सकारात्मक उर्जा में बढ़ोतरी की जा सके और ग्राहकों को प्रभावित किया जा सके।