2011-12 में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की शुरुआत से राजनीति के केंद्र में आए अरविंद केजरीवाल की अपने कई साथियों से लंबी साझेदारी लंबी नहीं चल सकी. केजरीवाल का साथियों से हाथ छूटने का सिलसिला भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल आंदोलन से ही शुरू हो गया था, लेकिन केजरीवाल के राजनीति में आने के बाद इसमें तेजी आई है. योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे पार्टी के संस्थापक आज पार्टी में नहीं हैं. अब राज्य सभा के लिए हुए टिकट बंटवारे से कुमार विश्वास भी नाराज नजर आ रहे हैं. पार्टी ने संजय सिंह के साथ ही सीए एनडी गुप्ता और कारोबारी सुशील गुप्ता को राज्य सभा भेजने का फैसला किया है. कुमार विश्वास ने भी अपने नाम के लिए दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन इसमें सफल नहीं हो सके. आइए जानते हैं अब तक कौन-कौन छोड़ चुके हैं केरजीवाल का साथ.


1. शांति भूषण- आम आदमी पार्टी को सबसे पहले चंदा देने वाले पूर्व कानून मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील शांति भूषण थे. शांति भूषण ने पार्टी की स्थापना पर 1 करोड़ रुपए का चंदा दिया था. हालांकि, 2014 से ही उनका आप से मोहभंग हो गया था. उन्होंने केजरीवाल को अनुभवहीन कहा और उनपर दिल्ली विधानसभा चुनावों में टिकट बंटवारे में गड़बड़ी, पार्टी में मनमानी चलाने जैसे आरोप लगाए. शांति भूषण पार्टी का साथ छोड़ने वाले सबसे पुराने लोगों में से थे.


2. प्रशांत भूषण- एक समय में पार्टी के थिंक टैंक का अहम हिस्सा रहे और कानूनी मोर्चे पर पार्टी की कमान संभालने वाले प्रशांत भूषण आज पार्टी के साथ नहीं हैं. यूपीए शासन में हुए घोटालों में उनकी शिकायतों और अपीलों पर पार्टी ने काफी सुर्खियां बटोरीं. उन्होंने 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले केजरीवाल पर टिकट बंटवारों में मनमानी का आरोप लगाया. उन्हें पार्टी की पीएसी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति से बाहर करने के बाद पार्टी से भी बाहर कर दिया गया. फिलहाल वह 'स्वराज अभियान' के साथ जुड़े हैं.


3. योगेंद्र यादव- राजनीतिक विचारक योगेंद्र यादव का भी आम आदमी पार्टी की स्थापना में अहम रोल रहा. योगेंद्र पार्टी के लिए चुनावी रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाते थे. हालांकि, उन्हें भी 2015 में प्रशांत भूषण के साथ, पार्टी विरोधी गतिविधिय़ों के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया. फिलहाल वह प्रशांत के साथ 'स्वराज अभियान' चला रहे हैं.


4. आनंद कुमार- समाजशास्त्री आनंद कुमार ने भी योगेंद्र और प्रशांत के साथ ही भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में हिस्सा लिया था. वह आम आदमी पार्टी के साथ शुरुआत से ही जुड़े रहे. उन्होंने पार्टी की ओर से उत्तरी-पूर्वी दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ा था और दूसरे नंबर पर रहे थे. उन्हें भी 2015 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में आप से बाहर निकाला गया. फिलहाल वह अध्यापन कर रहे हैं.


5. अंजली दमानिया- पेशे से पैथोलॉजिस्ट रहीं अंजली दमानिया अरविंद केजरीवाल के साथ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के समय से ही जुड़ गई थीं. वह महाराष्ट्र में आप की संयोजक भी रहीं. उन्होंने आरटीआई के जरिए 2011-2012 में कोंडाने बांध के घोटाले का खुलासा किया. 2012 में उन्होंने तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी पर एनसीपी नेता शरद पवार संग व्यापारिक रिश्ते रखने का आरोप लगाया. वह 2014 में पार्टी की ओर से नागपुर से लोकसभा चुनाव भी लड़ीं, पर हार गईं. 2015 में अरविंद केजरीवाल पर कांग्रेसी सांसदों को खरीदने का आरोप लगा तो उन्होंने पार्टी छोड़ दी. 


6. मयंक गांधी- सामाजिक कार्यकर्ता मयंक गांधी की अरविंद केजरीवाल के साथ साझेदारी भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के साथ हुई थी. इस दौरान वह आंदोलन की कोर कमेटी के 24 सदस्यों में भी शामिल थे. इसके बाद वह आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी शामिल रहे. केजरीवाल से मतभेद होने तक वह महाराष्ट्र में पार्टी प्रमुख भी बने रहे. उन्होंने प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को पार्टी से बाहर करने पर भी सवाल खड़े किए थे. उन्होंने केजरीवाल पर ईमानदारी की राजनीति से पीछे हटने, कार्यकर्ताओं का इस्तेमाल करके उन्हें छोड़ देने और राजनीति में अपनी रुचि खत्म होने का हवाला देकर नवंबर 2015 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.  


8. शाजिया इल्मी- शाजिया इल्मी पत्रकारिता से लोकपाल आंदोलन में आई थीं. वह आंदोलन की प्रवक्ता थीं. इसके बाद वह आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य भी रहीं. 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी.  इल्मी ने केजरीवाल पर पार्टी में आतंरिक लोकतंत्र नहीं बनाने का आरोप लगाया. इसके बाद वह बीजेपी में शामिल हो गईं.


9. विनोद कुमार बिन्नी- आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार में सबसे पहले विरोध की आवाज विनोद कुमार बिन्नी ने उठाई. बिन्नी आप के टिकट पर लक्ष्मीनगर से चुनाव जीते थे. आप में आने से पहले वह दो बार निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुके थे. दिसंबर 2013 में वह मंत्रालय बंटवारे से नाखुश हुए थे. इसके बाद उन्होंने पार्टी पर अपने सिद्धांतों से हटने का आरोप लगाया. जनवरी 2014 में उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया. जनवरी 2015 में वह बीजेपी में शामिल हो गए.


10. कपिल मिश्रा- दिल्ली की आप सरकार में जल संसाधन मंत्री कपिल मिश्रा से मई 2017 में उनका मंत्रालय ले लिया गया था. उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी निलंबित कर दिया गया था. तब मिश्रा ने पार्टी छोड़ने की धमकी दे रहे कुमार विश्वास का साथ दिया था. मंत्रालय छिनने के बाद मिश्रा ने दावा किया था कि उन्होंने मुख्यमंत्री को एक शख्स से 2 करोड़ रुपए रिश्वत लेते देखा है. उन्होंने केजरीवाल सरकार पर कई घोटालों के आरोप भी लगाए.