अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स, अमेरिका के एच-1बी वीजा जारी करने को लेकर नियमों को सख्त बनाने के कदम का विरोध कर रहा है. अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने एक बयान में कहा, "अमेरिका में स्थायी निवास के लिए आवेदन करने और वहां वर्षों से काम कर रहे उच्च कौशल वाले व्यक्ति से यह कहना खराब नीति होगी कि अब उनका आदर नहीं होगा".


आपको बता दें कि भारतीय आईटी कंपनियां प्रमुख रूप से एच-1बी वीजा प्राप्त करती हैं, जो कुशल कामगारों को अमेरिका लाने के लिए बनाया गया था और जिसका इस्तेमाल आमतौर पर आईटी कंपनियां करती रही हैं.


पिछले महीने, अमेरिका की न्यूज एजेंसी मैकक्लेटची के डीसी ब्यूरो की रिपोर्ट में कहा गया था कि अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग नए नियमन पर विचार कर रही है, जिसमें एच-1बी वीजा बढ़ाने पर रोक होगी. इस कदम का मुख्य उदे्दश्य लाखों विदेशी कामगारों को उनकी ग्रीन कार्ड आवेदन लंबित होने पर एच-1बी वीजा से रोकना है.


लेकिन अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कहा है, "इस नीति से अमेरिकी कारोबार, हमारी अर्थव्यवस्था और देश को नुकसान पहुंचेगा. साथ ही, अधिक प्रतिभा के आधार पर आव्रजन प्रणाली के लक्ष्यों के लिए भी यह मुनासिब नहीं होगा".


रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 2016 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान किए वादे 'बाय अमेरिकन हायर अमेरिकन' का हिस्सा है.


अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार सबसे पहले अमेरिकी कामगारों को नौकरी का मौका मिलना चाहिए. और सस्ते विदेशी कामगारों को लाकर इस वीजा का दुरुपयोग किया गया है. ट्रंप के आदेश में एच-1बी में इस तरह से सुधार लाने को कहा गया था ताकि वह अत्यंत कुशल या उच्चतम तनख्वाह वाले आवेदक को दिया जाए. इस समय ये वीजा लॉटरी के द्वारा दिया जाता है, जिसमें उम्मीदवार की कुशलता नजरअंदाज होती है और वेतन पर दबाव बनता है.


आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, राष्ट्रपति बनने से पहले इस वीजा का समर्थन करते थे. लेकिन बाद में वो इसके विरोध में ही दिखे हैं.