नई दिल्ली: भारतीय मूल के लोगों को विश्व में भारत का स्थायी राजदूत करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों में भारत में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, हमारे प्रति विश्व का नजरिया बदल रहा है तथा भारत के लोगों की आशाएं-आकांक्षाएं इस समय उच्चतम स्तर पर हैं।   


तीन-चार वर्षों में भारत के प्रति लोगों का नजरिया बदला

प्रथम प्रवासी सांसद सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आप लोग लंबे समय से अलग-अलग देशों में रह रहे हैं। आपने अनुभव किया होगा कि पिछले तीन-चार वर्षों में भारत के प्रति नजरिया बदल गया है। हमारे उपर ध्यान बढ़ रहा है, विश्व का हमारे प्रति नजरिया बदल रहा है, तो इसका मुख्य कारण यही है कि भारत स्वयं बदल रहा है, इसमें बदलाव आ रहा है । मोदी ने कहा, जैसा पहले था, वैसे ही चलता रहेगा, कुछ बदलेगा नहीं’’, इस सोच से भारत अब बहुत आगे बढ़ चुका है। भारत के लोगों की आशाएं-आकांक्षाएं इस समय उच्चतम स्तर पर हैं। व्यवस्थाओं में हो रहे संपूर्ण परिवर्तन का, इसमें हो रहे अपरिवर्तनीय बदलाव का परिणाम आपको हर क्षेत्र में नजर आएगा। 

मोदी ने किया कुंभ मेले का भी जिक्र

उन्होंने कहा कि जब भी किसी देश की यात्रा करता हूं, तो मेरा प्रयास होता है कि वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों से मिलूं । मेरे इस प्रयास का सबसे बड़ा कारण है कि मैं मानता हूं कि विश्व के साथ भारत के संबंधों के लिए यदि सही मायने में कोई स्थायी राजदूत है तो वे भारतीय मूल के लोग हैं । पीएम ने 2019 में होने वाले कुंभ मेले का भी जिक्र किया, उन्होंने कहा कि यूपी सरकार इसके लिए व्यापक तैयारी कर रही हैं। अगले साल जब आप भारत आएं तो कुंभ मेले का भी दर्शन करें. मोदी ने सभी से आग्रह किया कि अपने देश में इस बात को बताएं। मोदी ने कहा कि अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए दुनिया की सभी समस्याओं को सुलझाया जा सकता है. न्यू इंडिया के सपने को पूरा करने के लिए आप के साथ आगे बढऩा चाहते हैं।पीएम ने कहा कि 21वीं सदी भारत की है, लेकिन हमारी नजर किसी की जमीन पर नहीं है। 


आपको यहां देखकर पूर्वजों को होगी प्रसन्नता

मोदी ने कहा कि आपको यहां देखकर आपके पूर्वजों को कितनी प्रसन्नता हो रही होगी, इसका अंदाजा हम सभी लगा सकते हैं। वो जहां भी होंगे, आपको यहां देखकर बहुत खुश होंगे। सैकड़ों वर्षों के कालखंड में भारत से जो भी लोग बाहर गए, भारत उनके मन से कभी बाहर नहीं निकला। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कोई आश्चर्य की बात नहीं कि भारतीय मूल के प्रवासी जहां भी गए, वहीं पूरी तरह समावेशित हो कर, घुल मिलकर उस जगह को अपना घर बना लिया। उन्होंने जहां एक तरफ खुद में भारतीयता को जीवित रखा, तो दूसरी तरफ वहां की भाषा, वहां के खान-पान, वहां की वेश-भूषा में भी पूरी तरह घुल-मिल गए।  उन्होंने कहा कि राजनीति की बात करूं तो, मैं देख ही रहा हूं कि कैसे भारतीय मूल की एक मिनी विश्व संसद मेरे सामने उपस्थित है। आज भारतीय मूल के लोग मॉरीशस, पुर्तगाल और आयरलैंड में प्रधानमंत्री हैं। भारतीय मूल के लोग और भी बहुत से देशों में शासनाध्यक्ष और सरकार के मुखिया रह चुके हैं ।