वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन को करारा झटका लगा है. 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक साथ आए ‘यूपी के लड़के’ यानी राहुल गांधी और अखिलेश यादव गठबंधन के मूड में नहीं हैं. हालांकि दोनों की दोस्ती कायम रहेगी.

तो यूपी में टूटेगी राहुल-अखिलेश की दोस्ती?' पर मुहर लगाते हुए मंगलवार को अखिलेश यादव ने कहा कि अभी उनका ध्यान पार्टी को मजबूत करने पर है. गठबंधन पर नहीं. अखिलेश यादव ने कहा कि कांग्रेस से गठबंधन सिर्फ विधानसभा चुनाव तक ही था.


अखिलेश ने कहा, “केवल विधानसभा चुनाव के लिए ही गठबंधन था. अगर गठबंधन रहता तो निकाय चुनाव में भी साथ लड़ते. गठबंधन की बात अभी नहीं है. मेरा ध्यान पार्टी को मजबूत करने पर है. राहुल गांधी से दोस्ती बनी रहेगी.”


सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि गठबंधन का कोई फायदा नहीं मिला है. अब हमारा पूरा ध्यान लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी को मजबूत करने पर है.



बता दें इससे पहले सोमवार को अखिलेश यादव ने विधायकों, हारे हुए प्रत्याशियों और जिन सीटों पर कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था वहां के जिला पदाधिकारी और जिलाध्यक्षों के साथ अहम बैठक की. इस बैठक में 2019 लोकसभा चुनाव और गठबंधन पर चर्चा हुई.


इस बैठक में उन सीटों के जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों से फीडबैक लिया गया, जहां पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा और जिन सीटों पर गठबंधन की वजह से प्रत्याशी नहीं खड़े हुए नेताओं ने पार्टी आलाकमान को बताया कि गठबंधन से सपा को कोई फायदा नहीं हुआ है.