सांगानेरी माहेश्वरी भवन में चल रही श्रीमदभागवत कथा में उमड़ रहे है श्रद्धालु

भीलवाड़ा। महामण्डलेश्वर अनंतदेव गिरी महाराज ने कहा कि सनातन
धर्म हमे पुण्य कार्य करने की प्रेरणा देता है। लेकिन कलयुग में सनातन
धर्म विलुप्त होता जा रहा है। आज धर्म से दूर करने वाली वस्तुएं हमे चारो
और दिखाई दे रही है। शासन करने वाले ही धर्म से दूर करने वाली वस्तुओं का
लाइसेन्स दे रहे है। जुआंघर हो या मदिरालय या फिर वैश्यालय। सभी के
लाइसेन्स दिए जा रहे है और इन स्थानों पर जाकर लोग अपने धर्म व कर्म से
दूर होते जा रहे है।
श्री चारभुजा माहेश्वरी समाज सत्संग मण्डल भीलवाड़ा के तत्वावधान में
सांगानेर स्थित महेश भवन में आठ दिवसीय श्रीमद भागवत कथा ज्ञानयज्ञ
सप्ताह के तीसरे दिन कपिल देवहुति संवाद, दक्ष, धु्रव और पृथृ कथा,
प्रसंगो पर सैकड़ों की तादाद में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते
हुए महामण्डलेश्वर ने राजा परीक्षित के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि
राजा परीक्षित के शासनकाल में पाप पूर्ण स्थान देखने को नहीं मिलते थे
लेकिन  वर्तमान में हमारे शासक उन्हीं पापकर्मों को करने के लिए लाइसेन्स
दे रहे हैं। आज के राजा जुआ खेलने, मदिरा पीने, वेश्यावृति करने, पशुओं
का कत्ल करने व अन्य सभी प्रकार के गलत कार्य करने की छूट दे रहे है।
राजा परीक्षित के समय में उक्त स्थान ढुंढने पर भी नही मिलते थे लेकिन
वर्तमान में यह स्थान  पूरे संसार में जगह- जगह दिखाई दे जाएंगे। यह
हमारे सनातन धर्म की यह परंपरा नहीं है। हमारे सनातन धर्म की परंपरा वह
है जिसमें पुण्यदायक कार्यों को करने की प्रेरणा दी जाती है।
आयोजन समिति के प्रभारी गोवर्धनलाल डाड व रामेश्वर तोषनीवाल ने बताया कि
कथा के प्रांरभ में रतनलाल झँवर शाहपुरा, सीए कैलाश बाहेती, रामस्वरूप
सामरिया, कमलकांत वैद्यराज, मोहनलाल कोठारी, बालकिशनजी काबरा, ओमप्रकाशजी
शर्मा, लाला भाई, रामेश्वरलाल टेलर, कैलाशचंद आगाल, बालचंद काबरा ,
रामेश्वरलाल शर्मा, महावीर जांगिड़, कन्हैयालाल, गोपीकिशन चांडक सहित कई
गणमान्यजनो ने महामण्डलेश्वर 1008 स्वामी अनंतदेवगिरी महाराज (श्रीधाम
वृंदावन) सहित अनेक तीर्थों से आये संतगणो का माल्यार्पण कर स्वागत
सत्कार किया।
प्रवक्ता महावीर समदानी ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 1 से सायं 5 बजे
तक चलेगी। चौथे दिन जड़ भरत, वृत्रासुर, प्रहलाद व वामन अवतार की कथा,
पांचवे दिन श्रीराम कृष्ण जन्मोत्सव, छठे दिन श्री कृष्ण बाललीला,
गोवर्धन पूजा, महारास, सातवें दिन केस उद्वार, उद्वव चरित्र, , रूकमणी
विवाह, आठवें दिन सुदामा चरित्र, नव योगेश्वर संवाद, शुकदेव विदाई
प्रसंगो का वर्णन किया जाएगा। 14 जनवरी को हवन के साथ कथा की पुर्णाहूति
होगी।
महावीर समदानी, प्रवक्ता