योगी सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर और एक जमाने मे मुलायम सिंह यादव के करीबी एसपी सिंह बघेल ने अखिलेश यादव और उनकी सियासत को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि कुनबा बिखर गया तो वह उसे समेटने चले हैं.


एसपी सिंह बघेल ने कहा कि जिन 6-7 सीटों पर सैफई परिवार का प्रभाव है. वहां इन्होंने अपने परिवार को छोड़ किसी को आगे नहीं बढ़ने दिया. संभल, मैनपुरी, कन्नौज, फिरोजाबाद, बदायूं और अब आज़मगढ़ पर उनका कब्जा है. परिवार में नए दावेदार भी हैं और कुछ अपनी अगली पीढ़ी को बढ़ाना चाहते हैं.


उन्होंने कहा कि अब शिवपाल यादव का बेटा आदित्य यादव भी चुनाव लड़ना चाहता है. वहीं रामगोपाल यादव का बेटा अक्षय यादव पहले से फिरोजाबाद से सांसद है. शिवपाल यादव के करीबी बताते भी हैं कि अक्षय के फिरोजाबाद लड़ने की हालात में शिवपाल आदित्य को फिरोजाबाद से जरूर उतारेंगे.


वहीं बदायूं में धर्मेंद्र यादव की स्थिति भी पहले से खराब हुई है. अब अखिलेश यादव के कन्नौज से लड़ना भी तय माना जा रहा है. डिम्पल यादव के लिए माना जा रहा है कि वे चुनावी घमासान से इस बार बाहर ही रहेगीं. पिछली बार बड़ी मुश्किल से उनकी जीत हो पायी थी.



एसपी बघेल ने कहा कि मुलायम सिंह यादव पहले ही मैनपुरी से लड़ने का ऐलान कर चुके हैं, लिहाजा तेजप्रताप को भी या तो कोई और सीट तलाशनी होगी या तो इंतज़ार करना होगा. परिवार में मुलायम के दूसरे बेटे प्रतीक और बहू अपर्णा की राजनीतिक महत्वाकांक्षा किसी से छिपी नहीं है.


वे लखनऊ कैंट से चुनाव लड़ीं और हार गयी थीं, लिहाजा वो भी अपने राजनैतिक भविष्य को लेकर संभावनाएं तलाश रहे हैं.


इन तमाम समीकरणों पर एसपी सिंह बघेल कहते हैं ये लोग सेफ सीट ही चुनते हैं. जो खाली करता है, उसकी जगह भी परिवार के लोगों का ही चयन करते हैं. यही उनकी सबसे बड़ी मुश्किल है. वह कहते हैं कि मुलायम सिंह को अध्यक्ष पद से हटाने का अखिलेश यादव का फैसला मुलायम के चाहने वालो के लिए एक दर्द है.