इंदौर। दोपहिया वाहन पर बैठे दो-तीन बच्चे... साथ में भारी-भरकम बस्ते। बच्चों को छोड़ने के बाद कोई वैन तो कोई ऑटो रिक्शा वाले को फोन लगा रहा था कि भैया अभी तो हमने पहुंचा दिया है, लौटते में घर छोड़ने आओगे या नहीं? किसी का जवाब मिला हमें नहीं पता, तो किसी ने कहा अपना इंतजाम खुद कर लो। स्कूल प्रबंधन ने भी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।

शहर के कई स्कूलों के बुधवार को यही हाल थे। स्कूली ऑटो रिक्शा और वैन पर प्रशासन के प्रतिबंध के फैसले के बाद अभिभावकों में अफरातफरी मची हुई थी। सुबह से स्कूलों के बाहर अभिभावकों और बच्चों की भीड़ लग गई। ऑटो और वैन के आने पर असमंजस के कारण ज्यादातर अभिभावक ही बच्चों को स्कूल छोड़ने पहुंचे।

पश्चिमी क्षेत्र के चमेलीदेवी पब्लिक स्कूल, सेंट जोसफ, सेंट रेफियल्स, सेंट पॉल, सेंट अर्नाल्ड, सन्मति, किड्स नर्सरी व प्ले स्कूल सहित विभिन्ना स्कूलों के बाहर मेले जैसा नजारा था। कुछ अभिभावक प्रशासन के फैसले की सराहना कर रहे थे तो कुछ का कहना था कि प्रशासन को कम से कम एक हफ्ते का समय देना था।

पांच किमी रोज कैसे छोड़ने आएंगे

चमेलीदेवी स्कूल में बेटी को छोड़ने पहुंचे राजेंद्र सिंह ने कहा कि ऑटो वाला न फोन उठा रहा है, न मैसेज का जवाब दे रहा। स्कूल से घर पांच किलोमीटर दूर है। रोज बच्चे को स्कूल लेने-छोड़ने आना संभव नहीं है। प्रबंधन भी इस बारे में कोई जवाब नहीं दे रहा है।

प्रतिबंध ठीक, अभिभावकों की मुसीबत बढ़ी

बेटे को सेंट जोसफ स्कूल छोड़ने पहुंची रश्मि दुबे ने कहा कि प्रशासन ने वैन-ऑटो पर प्रतिबंध लगाकर तो ठीक किया, लेकिन अभिभावकों के लिए मुसीबत बढ़ा दी है। पहले स्कूल प्रबंधन से इसका विकल्प शुुरू करवाते, उसके बाद फैसले को लागू करते। नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए रोज बच्चे को स्कूल छोड़ना-लाना संभव ही नहीं है।

विश्वास में लेकर आदेश लागू करते

अभिभावक राजेश कुमरावत ने कहा ऑटो-वैन वाले इतने डरे हुए हैं कि वे अभिभावकों से बात भी नहीं कर रहे हैं। अचानक इस तरह की कार्रवाई करके प्रशासन क्या साबित करना चाहता है। व्यवस्था सुधारने के लिए ऑटो चालक, अभिभावक और स्कूल प्रबंधन सभी को विश्वास में लेना चाहिए था।

गाड़ियों की लगी कतारें

दोपहर में बच्चों को जब छुट्टी के समय अभिभावक स्कूल लेने पहुंचे तो बाहर गाड़ियों की कतारें लग गईं। चर्च चौराहा, बिजलपुर चौराहा, स्नेहलतागंज चौराहा, नंदानगर सहित कई मार्गों पर दोपहर में जाम लग गया। इतनी भीड़ में अपने बच्चों को ढूंढ़ने में भी अभिभावकों को काफी मशक्कत करना पड़ी।