लखनऊ समाजवादी पार्टी में बीजेपी और बीएसपी नेताओं के आने का सिलसिला जारी है. पार्टी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दुर्ग में सेंध लगाकर बीजेपी को झटका दिया है. गोरखपुर से सटे कुशीनगर जिले के बीजेपी के दो पूर्व विधायक आज समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए. इसके अलावा बसपा के भी एक पूर्व विधायक ने सपा की सदस्यता ली.


कुशीनगर जिले के दिग्गज नेता और ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले नंद किशोर मिश्र सेवरही विधानसभा क्षेत्र और शंभू चौधरी  नौरंगिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे हैं. इन दोनों पूर्व विधायकों ने बीजेपी छोड़कर सपा का दामन थाम लिया है. इन दोनों नेताओं को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी की सदस्यता दिलाई. बीजेपी के इन दोनों पूर्व विधयकों के अलावा बसपा के पूर्व विधायक ताहिर हुसैन भी सपा में अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं से साथ शामिल हुए.


नंद किशोर मिश्र पिछले तीस सालों से बीजेपी के साथ रहे हैं. लेकिन अब उनका पार्टी से मोहभंग हो गया है. उनका सपा में जाना 2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी के लिए काफी बड़ा झटका माना जा रहा है.


दूसरी ओर लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी सपा के लिए ये अच्छी खबर है. पिछले दिनों बसपा में रहे और 2017 में बीजेपी से विधानसभा चुनाव लड़ने वाले आरके चौधरी ने भी अखिलेश यादव की मौजूदगी में अपनी पार्टी डीएस-4 का सपा में विलय कर दिया था. इसके अलावा बीएसपी का दलित चेहरा माने जाने वाले इंद्रजीत सरोज भी पार्टी छोड़कर सपा में शामिल हुए हैं. पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाकर अहम जिम्मेदारी दी है. 


अखिलेश यादव ने कहा कि हमारी पार्टी में जहां राजनीतिक रूप से सक्रिय लोग शामिल हो रहे हैं. वहीं हम प्रोफेशनल लोग जैसे डॉक्टर, इंजीनियर और प्रोफेसर का भी पार्टी में स्वागत करेंगे. हमारी कोशिश है कि प्रोफेशनल लोग सपा में आएं.


अखिलेश ने कहा कि रंग की राजनीति सही नहीं है. बीजेपी के रंग धोखे वाली राजनीति के रहे हैं. होली के बाद बीजेपी नेताओं के रंग देखिएगा. जनता तैयार बैठी है.


कानून व्यवस्था की हालत दयनीय


अखिलेश यादव ने कहा कि यूपी की कानून व्यवस्था काफी खराब है. लोगों को पीट पीटकर मारा जा रहा है और पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही. बहन-बेटियों पर अत्याचार हो रहे हैं. अपराध की बाढ़ सूबे में आई हुई है.


यादव ने कहा कि बीजेपी सबसे बड़ी जातिवादी पार्टी है. पार्टी हमारे ऊपर जातिवाद का इल्जाम लगाती थी लेकिन अपने जातिवाद को सोशल इंजीनियरिंग कहती है. हम भी सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले को लेकर आगे बढ़ेंगे, लोहे को लोहे से काटेंगे.