उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन पर यूं तो पूर्वांचल से कई नेता आए लेकिन एक ऐसा भी नेता इस इलाके से आता है जो अपराध की दुनिया से राजनीति में आकर पूर्वांचल के गरीबों के लिए रॉबिनहुड बन गया. उस बाहुबली नेता का नाम है मुख्तार अंसारी. यूपी के माफिया नेताओं में मुख्तार अंसारी के नाम की तूती बोलती हैं.


कौन हैं मुख्तार अंसारी


मुख्तार अंसारी का जन्म यूपी के गाजीपुर जिले में ही हुआ था. उनके दादा मुख्तार अहमद अंसारी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे. जबकि उनके पिता एक कम्यूनिस्ट नेता थे. राजनीति मुख्तार अंसारी को विरासत में मिली. मगर खुद मुख्तार जुर्म के रास्ते पर चल पड़े. 40 से ज्यादा मुकदमें सिर पर लिए वो पिछले 13 सालों से जेल में बंद है. जितने मुकदमे हैं उतने ही आज दुश्मन हैं.


बीजेपी नेता कृष्णानंद राय की हत्या का आरोप



बता दें, कि यूपी के मऊ जिले से मुख्तार अंसारी बीते 5 बार से विधायक है. वो पिछले 13 सालों से जेल में ही बंद है. मर्डर, किडनैपिंग और फिरौती जैसी दर्जनों संगीन वारदातों के आरोप हैं. फिर भी दबंगई इतनी है कि जेल में रहते हुए भी न सिर्फ चुनाव जीतते हैं बल्कि अपने गैंग को भी चलाते हैं. 2005 में मुख्तार अंसारी पर मऊ में हिंसा भड़काने के आरोप लगे. साथ ही जेल में रहते हुए बीजेपी नेता कृष्णानंद राय की 7 साथियों समेत हत्या का इल्ज़ाम भी अंसारी के माथे पर लग चुका है.


गरीबों के लिए मसीहा


ठेकेदारी, खनन, शराब और रेलवे ठेकेदारी में मुख्तार अंसारी का कब्ज़ा है. जिसके दम पर आज उनकी पूरे इलाके में सिक्का चलता है. लेकिन उनकी पहचान गरीबों के लिए एक मसीहा के तौर पर होती है. ऐसा मऊ के लोग कहते हैं कि सिर्फ दबंगई ही नहीं बल्कि बतौर विधायक मुख्तार अंसारी ने अपने इलाके में काफी काम किया है.


सड़कों, पुलों, अस्पतालों और स्कूल-कॉलेजों पर अंसारी ने अपनी विधायक निधी से 20 गुना ज़्यादा पैसा खर्च करता है. वहीं गरीबों के लड़कियों की शादी से लेकर उनके सुख दुख में हमेशा खड़े नजर आते है.


परिवार का गौरवशाली इतिहास


मऊ में अंसारी परिवार की इस इज़्ज़त की एक वजह और है और वो है इस खानदान का गौरवशाली इतिहास है.बाहुबली मुख्तार अंसारी के दादा डॉ मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान 1926-27 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और वे गांधी जी के बेहद करीबी माने जाते थे. उनकी याद में दिल्ली की एक रोड का नाम उनके नाम पर है.


मुख्तार अंसारी के दादा की तरह नाना भी नामचीन हस्तियों में से एक थे. शायद कम ही लोग जानते हैं कि महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर उस्मान मुख्तार अंसारी के नाना थे. जिन्होंने 47 की जंग में न सिर्फ भारतीय सेना की तरफ से नवशेरा की लड़ाई लड़ी बल्कि हिंदुस्तान को जीत भी दिलाई. हालांकि वो खुद इस जंग में हिंदुस्तान के लिए शहीद हो गए थे.


बेटा हैं शूटिंग का इंटरनेशनल खिलाड़ी


मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी जो भले राजनीति के न सही मगर शॉट गन शूटिंग के इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं. दुनिया के टॉप टेन शूटरों में शुमार अब्बास न सिर्फ नेशनल चैंपियन रह चुके हैं. बल्कि दुनियाभर में कई पदक जीतकर देश का नाम रौशन कर चुके हैं.


कौमी एकता दल का गठन


मुख्तार अंसारी,अफजल और सिब्गतुल्लाह ने 2010 में राजनीतिक पार्टी कौमी एकता दल (QED) का गठन किया. इससे पहले मुख्तार ने हिन्दू-मुस्लिम एकता पार्टी नामक एक संगठन शुरू किया था. जिसका विलय QED में कर दिया गया था.