राजस्थान के उदयपुर शहर में गुरुवार को डॉक्टरों ने एक नन्हीं सी जान को नया जीवन देकर चिकित्सकीय दुनिया का करिश्मा कर दिखाया. यह भारत ही नहीं बल्कि दक्षिणी एशिया की सबसे कम उम्र की प्रिमेच्योर बेबी से जुड़ा केस है. शहर के डॉक्टर ने महज 400 ग्राम के एक बच्ची को 210 दिनों  के लंबे इलाज के बाद नया जीवन दिया है.


यह बच्ची इस दुनिया में सात महीने पहले आई थी, लेकिन इसे इन सात महीनों में इसके माता-पिता के अलावा किसी ने नहीं देखा. दरअसल यह सात महीने तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती रही और अंत में मौत को हराकर जिंदगी जीत गई. इस बच्ची को लेकर चिकित्सकों ने दावा किया है कि यह भारत ही नहीं दक्षिणी एशिया की सबसे छोटी और कम वजनी बच्ची थी.


इस बच्ची का जन्म समय से पहले ही हो गया था. पैदा होने पर इसका वजन सिर्फ चार सौ ग्राम था. इतने कम वजनी बच्चे का आमतौर पर बचना मुश्किल होता हैं लेकिन अब इसके माता-पिता इसे उदयपुर के एक निजी हॉस्पीटल में लेकर पहुंचे तो वहां के चिकित्सकों ने कई बाधाओं को पार करते हुए बच्ची को नया जीवन दे दिया.


अब 210 दिन बाद इस बच्ची का वजन 2.4 किलो हो गया हैं और वह पूरी तरह से स्वस्थ है. दक्षिणी एशिया में 400 ग्राम की बच्ची को नया जीवन देने का रिकॉर्ड बनाने वाले चिकित्सकों की खुशी भी अब चरम पर है.



कोटा की रहने वाली सीता को 45 साल की उम्र में बच्ची के जन्म की खुशी मिली लेकिन प्रीमेच्योर होने के चलते उसका वजन सिर्फ 400 ग्राम था. चिकित्सकों ने उसके बचने की संभावनाओं से इनकार कर दिया था. ऐसे में अब उसे उदयपुर के हॉस्पिटल की जानकारी हुई तो वो अपने बच्चे को लेकर यहां पहुंचीं.


पहले भी पांच सौ ग्राम तक के बच्चे बचाने का अनुभव रखने वाले इन चिकित्सकों ने इसे भी एक परिक्षा के रूप में लिया और बच्चे को बचाने में सफलता हासिल कर ली. अब इस बच्ची की मां चिकित्सकों को दुआएं देते नहीं थक रही.


वैसे तो सात महीने तक चला पूरा इलाज काफी महंगा था लेकिन परिवार की स्थिति खराब होने के कारण बीच में ही इलाज बंद कराने की नौबत आई. हालांकि चिकित्सकों के सामने इस बच्ची को बचाना एक बड़ी चुनौती थी. उसके बावजुद इलाज का करीब 75 फिसदी खर्च हॉस्पिटल ने उठाया और बच्ची को नया जीवन देकर उसके माता पिता के जीवन में खुशियां भर दी.