रायपुर। शासन ने जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए नियमों का सरलीकरण कर दिया है। अब प्रमाण पत्र बनाने के लिए लोगों को 1950 के पूर्व का राजस्व दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करना पड़ेगा। इस आदेश के जारी होते ही गांड़ा समाज में खुशी की लहर दौड़ गई। समाज के लोगों ने घड़ी चौक पर डॉ.भीमराव अंबेडकर प्रतिमा के समक्ष एकत्रित होकर एक-दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई दी और मिठाई खिलाकर खुशियां मनाईं।


महिलाओं के नेतृत्व में किया जा रहा था संघर्ष


गांड़ा महासभा महिला विभाग की अध्यक्ष व जाति प्रमाण पत्र बनाओ संघर्ष मोर्चा की अध्यक्ष श्रीमती सावित्री जगत ने बताया कि जाति प्रमाणपत्र बनाने की कठिन प्रक्रिया से गांडा समाज के लोग परेशान थे। कई सालों से सरलीकरण करने के लिए संघर्ष किया जा रहा था।


अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के लोगों को 1950 के पूर्व का राजस्व दस्तावेज मांगा जाता था, जो कि गरीबी एवं अशिक्षा के कारण इतने पुराने दस्तावेज इस वर्ग द्वारा दिया जाना संभव नहीं था। लाखों लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा था।


राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल समेत छत्तीसगढ़ के 90 विधायक, 11 सांसदों से गुहार लगाई गई। धरना प्रदर्शन किया। सरलीकरण की आवाज विधानसभा में भी गूंजी। अनुसुचित जाति जनजाति मंत्री केदार कश्यप, नगरीय निकाय मंत्री अमर अग्रवाल, मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, भाजपा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक व अधिकारियों ने भी आश्वासन दिया।


घड़ी चौक पर खुशियां मनाने वालों में प्रमुख रूप से गांड़ा महासभा महिला विभाग की अध्यक्ष श्रीमती सावित्री जगत, कौशल्या सागर, सीमा क्षत्रि, अनिता बघेल, अधिवक्ता बिमला ताण्डी, हेमा सागर, गीता दुर्गा, बिंदिया नाग, माला दीप, सपना महानंद, मीनाक्षी महानंद, पिंकी निहाल, जमुना क्षत्रि, दयाबती सोनी, यशोदा नायक, संयोजक रघुचंद निहाल, अध्यक्ष राजेश दीप, भगवानु नायक, राजमोहन बाघ समेत काफी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।


कर्मी घर पहुंचकर भरेंगे आवेदन


नए आदेश के अनुसार जिनके पास मूल निवास व जाति सम्बन्धी दस्तावेज नही है सरकार उनके घर पहुँच कर आवेदन भरेगी। पटवारी प्रतिवेदन लिया जाएगा और आवेदन नगर निगम की सामान्य सभा मे पारित कर तहसीलदार को भेजा जाएगा जहां से उन्हें जाति प्रमाण पत्र बनाकर दिया जाएगा।