नई दिल्ली । सिक्कों की भरमार और जगह की कमी के चलते सरकार की ओर से रोके गए सिक्कों की ढलाई का काम फिर से शुरू कर दिया गया है। सरकार ने देश की चारों टकसालों को फिर से प्रोडक्शन शुरू करने के लिए कहा है। यह कार्य हालांकि धीमी रफ्तार पर होगा। यह जानकारी उद्योग के सूत्रों से अनुसार है। सरकार ने सभी सिक्का टकसालों को नियंत्रित करने वाली संस्था भारतीय प्रतिभूति मुद्रण तथा मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड (एसपीएमसीआईएल) से एक ही शिफ्ट में काम करने लिए कहा है।


आपको बता दें कि एसपीएमसीआईएल कोलकाता, मुंबई, नोएडा और हैदराबाद स्थित चारों टकसालों को नियंत्रित करता है। यहां पर काम दो शिफ्टों में किया जाता है। कोलकाता सिक्का टकसाल के कर्मचारी एसोसिएशन के वाइस प्रजिडेंट बिजन डे ने बताया, “हमने सिक्कों की ढलाई का काम कल से शुरू कर दिया है। हमें सभी गुणांक के सिक्कों का प्रोडक्शन करने के लिए कहा गया है। ”


अधिकारी ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2017-18 में कुल 771 करोड़ सिक्कों की मांग रखी थी। इसमें से देश की चारों सिक्का टकसालों में अबतक 590 करोड़ सिक्कों का उत्पादन हो चुका है। फिलहाल 253 करोड़ सिक्कें आरबीआई की ओर से मिलनी बाकी है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के दौरान 24 नवंबर 2017 तक अर्थव्यवस्था में एक, दो, पांच और दस रुपये के कुल 676 रुपये के सिक्के प्रचलन में है।


क्या था सिक्के बंद होने का कारण-

सिक्के बंद करने के पीछे का मुख्य कारण यह माना जा रहा था कि देश में नोटबंदी लागू होने के बाद भारी मात्रा में सिक्के बनाए गये थे। यह सभी सिक्के भारतीय रिजर्व बैंक के स्टोर में अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं। सूत्रों की मानें तो आठ जनवरी तक 2500 एमपीसीएस सिक्कों का स्टोरेज है। यही वजह है कि रिजर्व बैंक के अगले आदेश तक इन सिक्कों का प्रोडक्शन रोक दिया गया था।