रायपुर। रात के अंधेरे में रेलवे की संपत्ति चोरी करने वाले शातिरों को दबोचने के लिए रायपुर में रेल सुरक्षा बल अब हाइटेक तकनीक का इस्तेमाल करेगा। अगर रेल मंत्रालय की मंजूरी मिली। सुरक्षा जवान रात होते ही हाथों में नाइट विजन डिवाइस लेकर दौड़ेंगे।


चोरों को पकड़ने लेजर प्रणाली की नई तकनीक का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। आमतौर पर यह तकनीक बार्डर पुलिस इस्तेमाल करती है। तकनीक के आने के बाद रात में अपराधियों को दबोचने आसानी होगी। रेलवे के एक करीबी सूत्र के मुताबिक आरपीएफ रायपुर की ओर से तकनीक की मांग रखी गई है।


अलबत्ता प्रस्ताव बना रेलवे को भेज दिया गया है। सूत्र का कहना है नाइट विजन डिवाइस संदिग्धों की परछाई पकड़ते ही अलर्ट कर देते हैं। अगर कोई अप्रिय घटना को अंजाम देकर अंधेरे या सूनसान रास्ते की ओर भागा, लेजर प्रणाली की तकनीक उसी दिशा में काम करेगी। नाइट विजन डिवाइस को संदिग्ध के भागने वाली दिशा में घुमाते ही वह शातिर का पता लगा लेगी।


तकनीकी की खासियत यही है कि रात के समय दूर से भी संदिग्ध की परछाई पर फोकस कर लेता है। अगर कोई चेहरा या परछाई तकनीक के रेंज में आई, तुरंत उसके बारे में जानकारी मिल जाएगी। इससे संदिग्धों को पकड़ना और भी आसान रहेगा।


हाईटेक डिवाइस को लेकर रेल अधिकारी आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कह रहे हैं, लेकिन सूत्र का दावा है रेल विभाग को नई तकनीक के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है।




पुराने बंदोबस्त काफी नहीं 


रेल सुरक्षा बल के पास मौजूदा स्थिति में जो तकनीक रखे गए हैं, रात के समय चोरों को पकड़ने काफी नहीं है। दरअसल सुरक्षा जवाब आज भी पुराने समय में खरीदे गए वॉकी टॉकी और पुराने टार्च लाइट का ही इस्तेमाल कर रहे। रात के अंधेरे में चोर या लुटेरे आसानी से छिपकर चकमा दे जाते हैं। लेजर प्रणाली की तकनीक में छिपने वाले ठिकाने की जांच आसान होगी।


बॉर्डर फोर्स के पास डिवाइस 


देश में अभी नाइट विजन डिवाइस का इस्तेमाल बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के जवान करते हैं। बॉर्डर पर रात के समय की गतिविधियां जांचने डिवाइस मदद करती है। कई बार ऐसे हालात होते हैं जब घने जंगलों और सूनसान जगहों पर खोजबीन करनी पड़ती है। इस डिवाइस से संदिग्धों के परछाई नापकर उस तक पहुंच जाते हैं।


रेल यात्रियों की सुरक्षा के लिए चाक चौबंद व्यवस्था किए जा रहे हैं। रायपुर रेलवे स्टेशन में कैमरों से निगरानी हो रही। सुरक्षा को दुरुस्त करने दूसरी योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। - अनुराग मीणा, सुरक्षा आयुक्त रेल