एमपी सरकार चुनावी साल में कर्मचारियों को सौगातें देने में कसर नहीं छोड़ रही है. अध्यापकों और पंचायत सचिवों को सौगात के बाद सरकार अधिकारियों व कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए राज्य कर्मचारी कल्याण समिति ने भी शासन को प्रस्ताव भेजा है.


कर्मचारी संगठन पिछले कई सालों से ये मांग करते आ रहे हैं. ज्यादातर संगठनों ने इस मांग को लेकर समय-समय पर आंदोलन भी किए हैं. तृतीय वर्ग संघ के प्रतिनिधिमंडल ने तीन दिन पहले ही सीएम और समिति के चेयरमैन को इस मांग को लेकर ज्ञापन दिया था. मप्र कर्मचारी कांग्रेस, संयुक्त मोर्चा, राज्य कर्मचारी संघ समेत अन्य संगठनों ने सीएम, जीएडी राज्य मंत्री, मुख्य सचिव को ज्ञापन देकर ये मांग की.


चुनावी साल में कर्मचारी संघ इस मांग को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं. अभी स्वास्थ्य विभाग में कुछ संवर्गों और स्कूल शिक्षा विभाग में रिटायरमेंट की आयु सीमा 60 से ज्यादा है. राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के चेयरमैन रमेशचंद्र शर्मा का कहना है कि राज्य कर्मचारी संघ समेत कई कर्मचारी संघों के ज्ञापनों के बाद समिति ने शासन को प्रस्ताव भेजा है. प्रस्ताव में सरकार को प्रदेश के हर कैडर के अधिकारियों-कर्मचारियों की स्थिति से अवगत कराया है.


चुनावी साल में कर्मचारियों को सौगात !



- 60 से 62 साल हो सकती है रिटायरमेंट की उम्र

- 40 फीसदी कर्मचारियों को होगा फायदा

- एमपी में डॉक्टर्स की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल

- नर्सेस की रिटायरमेंट की उम्र 62 साल

- चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की रिटायरमेंट की उम्र 62 साल

- शिक्षकों की रिटायरमेंट की उम्र 62 साल


दरअसल, राज्य में पिछले कई सालों से सीधी भर्ती पर रोक लगी है. अधिकारियों और कर्मचारियों के तेजी से रिटायरमेंट हो रहे हैं. संविदा नियुक्ति देने में अड़चनें आ रही हैं. बड़े पदों पर ही सरकार ये काम कर पा रही है. ऐसे में कई विभागों मे कर्मचारियों की भारी कमी हो गई है.