नई दिल्ली  क्या भारत और मालदीव की सरकारों के बीच तनाव गहरा गया है? यह सवाल इसलिए उठता है क्योंकि देश में जारी उथल-पुथल के बीच मालदीव के राष्ट्रपति ने सऊदी अरब, चीन और पाक के लिए दूत भेजे हैं, लेकिन भारत में किसी को नहीं भेजा। मालदीव की सरकार की ओर से कहा गया कि राष्ट्रपति के निर्देश पर कैबिनेट के सदस्य मालदीव के मित्र देशों के दौरे पर जा रहे हैं और मौजूदा हालात पर उन्हें अपडेट देंगे। देश के विदेश मंत्री पाकिस्तान गए हैं, जबकि आर्थिक विकास मंत्री चीन के लिए रवाना हुए हैं। कृषि मंत्री सऊदी अरब जाएंगे।

मालदीव में आपातकाल घोषित किए जाने के बाद हालात की जानकारी देने के लिए भारत में किसी दूत के भेजे जाने की जानकारी नहीं दी गई। इस पर यहां कहा गया कि भारत को नजरअंदाज किया जा रहा है। कुछ समय पहले मालदीव के राष्ट्रपति के विशेष दूत जब भारत आए थे, तब उन्होंने कहा था कि भारत हमारे लिए सबसे पहले है। हालांकि मालदीव के दूतावास की ओर से कहा गया कि यह सच नहीं है कि भारत को नजरअंदाज किया गया है। 

दूसरी तरफ भारतीय सूत्रों का कहना है कि हमने प्रोटोकॉल कारणों से दूत भेजने का ऑफर ठुकरा दिया है। मालदीव के दूतावास की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज के मुताबिक, 'राष्ट्रपति के दूत का पहला स्टॉप भारत ही होना था। विशेष दूत तय किए गए विदेश मंत्री मोहम्मद आसिम को 8 तारीख को भारत आना था, लेकिन भारतीय नेतृत्व की ओर से इस दौरे को रद्द करने की मांग की गई।' 


प्रोटोकॉल के चलते मालदीव के दूत को नहीं मिली तारीख? 

यहां विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि राजनयिक भेजे जाने का प्रोटोकॉल तय है। हमें राजनयिक भेजे जाने के मकसद की जानकारी नहीं दी गई। दूसरी बात यह है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज देश से बाहर हैं। प्रधानमंत्री भी कल से देश से बाहर होंगे। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भारत ने जो चिंताएं जताई हैं, उन पर कोई वास्तविक कदम नहीं देखा गया है। लोकतांत्रिक संस्थाओं और न्यायपालिका को दबाया जा रहा है और चिंताओं को अनदेखा किया जा रहा है। इन मुद्दों से उचित तरीके से सुलझाए जाने की जरूरत है। 


मालदीव पर लगातार बढ़ रहा चीन का प्रभाव 

इस बीच चीन ने कहा है कि मालदीव का मौजूदा विवाद वहां का आंतरिक मामला है और संबंधित पक्षों को बातचीत के जरिये इसे सुलझाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मालदीव की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए और सकारात्मक सहयोग करना चाहिए। यहां बता दें कि मालदीव पर चीन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति को चीन का पूरा समर्थन हासिल है। वहां विपक्ष के नेता नशीद को भारत के करीब देखा जाता है, जिनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने केस खत्म कर दिया तो मालदीव में हालात बिगड़ गए।