वाशिंगटन । सीरिया में बुधवार देर रात अमेरिकी गठबंधन सेनाओं और उनकी समर्थित मिलीशिया के हमले में एक सौ से ज्यादा सरकार समर्थक सैनिक मारे गए। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार हमले में तोपों, टैंकों, रॉकेट लांचर और मोर्टार का इस्तेमाल किया गया। यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई। इस दौरान किसी भी अमेरिकी सैनिक को कोई नुकसान नहीं हुआ। रूस ने इस हमले पर कड़ी नाराजगी जताई है और इसे शांति प्रयासों का उल्लंघन बताया है।


दो हजार अमेरिकी सैनिक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) के खिलाफ जंग के सिलसिले में सीरिया में तैनात हैं। ये सैनिक राष्ट्रपति बशर अल-असद की सत्ता के विरोध में लड़ रहे सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (एसडीएफ) का समर्थन करते हैं। एसडीएफ में 50 हजार से ज्यादा कुर्द और अरब लड़ाके हैं। एसडीएफ के मुख्यालय पर हाल ही में हुए सरकारी फौज के हमले के जवाब में अमेरिका के नेतृत्व वाले फौजी लश्कर ने यह कार्रवाई की है।

असद समर्थकों के हमले में एसडीएफ का एक लड़ाका मारा गया था। लेकिन रूसी सांसद फ्रैंज क्लिंसेविच ने इसे हमले की कार्रवाई बताया है जिसके पीछे कोई कारण नहीं था। इस हमले में युद्ध के किसी नियम का पालन नहीं किया गया और रात के अंधेरे में अचानक हमला बोला गया।


यमन में ड्रोन हमला, चार मरे


यमन के अल कायदा के कब्जे वाले इलाके में अमेरिकी ड्रोन के हमले में चार आतंकियों के मारे जाने की खबर है। यह कार्रवाई बुधवार को अल-बायदा प्रांत में एक ठिकाने पर हुई। अमेरिकी एजेंसियों को वहां पर आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। यमन में ईरान समर्थित लड़ाके और अल कायदा काफी समय से सरकार को हटाकर वहां पूरी तरह कब्जा करने की कोशिश में हैं। वहां पर सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन की फौजें उन्हें रोक रही हैं।