नई दिल्ली: टीम इंडिया के हालिया वनडे मैचों में देखने में आया है कि जहां नंबर चार क्रम (अजिंक्य रहाणे) तक के बल्लेबाजों का ऑर्डर करीब-करीब पक्का है, तो वहीं पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के क्रम से लेकर नंबर सात क्रम पर कभी किसी बल्लेबाज को भेज दिया जा रहा है, तो कभी किसी दूसरे बल्लेबाज को. लेकिन पोर्ट एलिजाबेथ मुकाबले से पहले इस बात से पर्दा हट गया है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. और इसके पीछे क्या मकसद है. यह खुलासा किया पांचवें वनडे की पूर्व संध्या पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए फील्डिंग कोच आर श्रीधर ने.

अगर भारत ने हाल ही में इन तीन बैटिंग ऑर्डर पर बल्लेबाजों के साथ फेरबदल किया है, तो इसके पीछे एक नहीं, बल्कि तीन बड़े मकसद हैं. और विराट कोहली एंड कंपनी और कोच रवि शास्त्री चाहते हैं कि अगले साल विश्व कप से पहले ये बातें पूरी तरह से दुरस्त हो जाएं. चलिए हम आपको ये तीन वजह बता देते हैं. जिनके चलते बार-बार नंबर-5, 6 और 7 क्रम के बल्लेबाजों को ऊपर-नीचे किया जा रहा है. 


पहला कारण

आर श्रीधर ने बताया कि हमारी पहली सोच यह है कि हमारा मकसद है कि हालात को पढ़ना और यह पता लगाना कि कौन सा खिलाड़ी इस तरह की परिस्थितियों में सर्वश्रेष्ठ साबित हो सकता है. 

दूसरा कारण 

फील्डिंग कोच ने कहा कि टीम मैनेजमेंट चाहता है कि विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी के अलावा दूसरे खिलाड़ी भी जिम्मेदारी लें. और 50वें ओवर की आखिरी गेंद तक हमारे लिए मैच जिताकर  लेकर आएं. उन्होंने कहा, इसीलिए हम ज्यादा फिनिशर्स  चाहते हैं. हम उन्हें ज्यादा से ज्यादा प्रशिक्षित कर ज्यादा मैच फिनिशर्स विकसित करना चाहते हैं. तीसरा कारण 

आर श्रीधर ने टीम मैनेजमेंट का लक्ष्य साफ करते हुए कहा कि हम यह भी चाहते हैं कि नंबर-5, 6 और सात के बल्लेबाज हालात को समझना और पढ़ना सीखें और इसके अनुसार बल्लेबाजी करें. यही कारण है कि हम पिछले कई मैचों से इन क्रमों को लेकर रोटेशन पॉलिसी अपनाए हुए हैं. लेकिन जल्द से जल्द ही इन क्रमों पर स्थायी बल्लेबाजों की चुनने की जिम्मेदारी को अंजाम दे दिया जाएगा. इंग्लैंड में अगले साल होने वाले विश्व कप के लिए वास्तव में यह एक अच्छी सोच है. अब जबकि धोनी अपने आखिरी दौर में हैं, तो यह बहुत ही जरुरी है कि पूर्व कप्तान के अलावा निचले क्रम में टीम इंडिया के पास एक अच्छा मैच जिताऊ बल्लेबाज या बेहतरीन फिनिशर हो.