प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक इंटरव्यू के बाद जिस पकौड़े ने देश की राजनीति में मचमच मचा दी है. वही पकौड़ा आस्कर अवार्ड की दौड़ में शामिल न्यूटन फिल्म के कलाकार की रोजी रोटी का जरिया है. छत्तीसगढ़ के बस्तर के बिहड़ में रहने वाला ये कलाकर पकौड़ा-भजिया बनाकर ही अपनी रोजी रोटी का इंतजाम करता है. हालांकि इससे उसका गुजारा ठीक से नहीं चल पा रहा है.

बस्तर संभाग के कोंडागांव के अति संवेदनशील एरिया बायनर के कोराबेडा में रहने वाले सुखराम नेताम ने आठवीं तक की पढ़ाई की है. हाल ही में चुनाव और नक्सल मामलो को लेकर बनी न्यूटन फिल्म में अपनी कला और गायन का जादू सुखराम बिखेर चूके हैं. यही न्यूटन फिल्म आॅस्कर की दौड़ में शामिल हो चुकी है.


सुखराम नेताम ने बताया की दाल्ली राजहरा में 15 दिन शूटिंग हुई जिसमे उसने हल्बी गाना गाया. आज घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं होने के कारण पढ़ाई छोड़ कर वह अपने रोजी रोटी कमाने के लिए होटल में काम कर रहा है. होटल में पकौड़ा छानने के बाद भी सुखराम आगे तो पढ़ना चाहता है पर पढ़ाई के लिए पैसे नहीं हैं.

कलाकार सुखाराम ने बताया कि छ सदस्यों वाले परिवार की माली हालत ठीक नहीं है. इसे देख परिवार का साथ देने के लिए वह रोजी रोटी कमाने के लिए निकल पड़स है. सुखराम कहता है वह आगे पढ़ना चाहता और पढ़ लिखकर मुंबई जाकर हीरो बनना चाहता है.


घर से काम की तलाश में भटकता सुखराम बायनर के एक होटल में काम कर रहा है. होटल के मालिक फूलचंद मानिकपुरी ने कहा इतने बड़े फिल्म में काम कर चूका सुखराम काम के लिए भटकते हुए उसके होटल में आया, उसकी हालत देखकर उसे मैंने काम पर रखा है.