मेहनत, लगन और अनुभव के साथ यदि कोई काम किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है. यह लाइन सतना के दसरथ मल्लाह पर बिल्कुल सटीक बैठती है. दशरथ ने बांग्लादेश और अमेरिका में पाई जाने वाली दुर्लभ प्रजाति की मछली चीतल का मत्स्य पालन कर पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है.


दशरथ की इस उपलब्धि को देख मत्स्य विभाग भी हैरान है.दरअसल, इन मछलियों को दिया जाने वाला दाना भी वो खुद ही तैयार करता है. अब सतना का मत्स्य विभाग दशरथ की इस उपलब्धि को मॉडल के रूप में लेकर पूरे प्रदेश मे प्रचारित करने की तैयारी में है.


चीतल प्रजाति की मछली के बारे में बात करें तो इनमें सबसे ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है.ये मछलियां बेहद चमकदार होती हैं और इनका वजन 7 से  8 किलो तक होता है.बाजार में इनकी कीमत भी अच्छी मिल जाती है.दशरथ ने बताया कि ये मछली करीब 8 सौ रुपए किलो तक बिक जाती है.


हनुमान नगर नई बस्ती इलाके में रहने वाला दशरथ कुछ समय पहले तक आर्थिक परेशानियों से जुझ रहा था.उसने जगह-जगह घूम कर मछली पालन और इनकी विभिन्न  प्रजातियों के बारे में जाना.18 महीने पहले वो बिहार गया और उसने वहां चीतल प्रजाति की मछली के बारे में जाना.

मछली के इस बीज को वो अपने साथ सतना ले आया और मत्स्य विभाग से लीज पर एक तालाब लिया. जहां उसने चीतल प्रजाति की मछली का बीज डाला इनको देने वाली खुराक के लिए उसने कई किस्म की मछलियों को सुखाकर उनका पाउडर बनाया.इसी पाउडर का दाना बनाकर वो इन मछलियों को देने लगा.

अब उसके तालाब में सैकड़ों की संख्या में मछलियां हो गई हैं.सतना मत्स्य विभाग के उपसंचालक अनिल निगम से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा, एक साल के भीतर विषम परिस्थतियों में दशरथ ने काम किया है.उसने निजी अनुभव से ही मछलियों के दाना भी तैयार किया है. विभाग इसका मॉडल बनाकर पूरे प्रदेश में प्रचार करने की तैयारी कर रहा है.