अन्नू कपूर का नाम जहन में आते ही 'बेताब' का चेलाराम और 'चमेली की शादी' का छदम्मी लाल याद आ जाता है. जो नई पीढ़ी के हैं, उन्हें 'ऐतराज' का बैरिस्टर राम चोटरानी और 'विक्की डोनर' का डॉक्टर बलदेव चड्ढा याद आता है. बहुमुखी प्रतिभा के धनी अन्नू कपूर 20 फरवरी, 1956 को जन्मे थे. उन्होंने अपनी पहचान सिंगिंग रियलिटी शो अंताक्षरी से बनाई. लेकिन इससे पहले उनका जीवन कितना संघर्षमयी रहा, ये बहुत कम लोग जानते हैं.

अन्नू कपूर ने बचपन में तय किया था कि वे सर्जन या आईएएस अफसर बनेंगे, लेकिन घर की आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण उन्हें दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पढ़ी और उन्होंने चाय की दुकान पर काम किया. कभी पटाखे बेचे तो कभी लॉटरी का टिकट.

अन्नू कपूर ने 2016 में एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि वे 43 साल पहले अपनी मां से नाराज होकर लखनऊ चले गए थे.  वहां एक लवलेन मार्केट थी और उसी की छत पर डिलाइट होटल था. वहीं, चोपड़ा जी का ऑफिस था. उस बुरे दौर में वे वहीं पनाह लेते थे. बकौल अन्नू 'मैं ऑफिस की बेंच पर रात में सोता था. लखनऊ और आसपास में जब कभी कोई स्टेज शो होता तो मैं भी उसमें कभी पांच मिनट गाना गाता तो कभी मिमिक्री करता. उन शो में मुझे पांच-पांच रुपये मिलते थे. एक साल तक मैंने इस शहर में ऐसे ही अपना गुजारा किया.

जब अन्नू कपूर ने देखा कि उनका जीवन पटरी पर नहीं आ रहा है तो उन्होंने अपने पिता का परसी थिएटर जॉइन कर लिया.  1976 में उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाख‍िला मिल गया. इसका रास्ता उन्हें उनके भाई रंजीत कपूर ने सुझाया था, जो लेखक और निर्देशक हैं.

अन्नू कपूर का रियल नेम अनिल कपूर है, लेकिन उन्होंने एक्टर अन‍िल कपूर के साथ कोई कंफ्यूजन न हो, इसलिए अपना नाम बदलकर अन्नू कपूर कर लिया.

अन्नू कपूर को म्यूजिक रियलिटी शो अंताक्षरी से खासी पहचान मिली. इसमें वे पल्लवी जोशी के साथ नजर आते थे. ये शो काफी पॉपुलर हुआ. इसके बाद अन्नू कपूर को एक के बाद एक फिल्मों में रोल मिले.

अन्नू कपूर ने 1986 में फिल्म 'एक रुका हुआ फैसला' में 70 साल के बूढ़े का किरदार निभाया था. इससे उन्हें खासी प्रशंसा मिली. श्याम बेनेगल उनसे प्रभावित हुए और उन्हें अपनी फिल्म मंडी के लिए साइन कर लिया.