इंदौर । ऑक्सीजन लाइन जोड़ने में हुई गड़बड़ी की वजह से एमवाय अस्पताल में दो बच्चे जान गंवा चुके हैं। इसके बाद भी लापरवाही कम होने का नाम नहीं ले रही है। अस्पताल की चौथी मंजिल पर बनी बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट का सीएम के हाथों लोकार्पण कराने की जल्दबाजी में प्रबंधन यूनिट में ऑक्सीजन लाइन जुड़वाना ही भूल गया। अब जब ट्रांसप्लांट शुरू करने की बात हो रही है तो पता चला कि यूनिट में ऑक्सीजन सप्लाय ही नहीं हो रही है। इधर, यूनिट की कल्चर रिपोर्ट लगातार पॉजीटिव आ रही है। ऐसे में इसके पूरी तरह संक्रमणमुक्त होने में भी शंका है।


पांच करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुई बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट का लोकार्पण 21 जनवरी को सीएम शिवराजसिंह चौहान ने किया था। दावा है कि यूनिट अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों के मुताबिक तैयार की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि यूनिट में अब तक ऑक्सीजन सप्लाय करने वाली लाइन ही नहीं जोड़ी गई। ऐसे में दावों पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, लोकार्पण का श्रेय लेने की होड़ में यह गड़बड़ी हुई है। खुद सीएम को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई थी।


लाइन जोड़ने के बाद कराना होगा फ्यूमिगेशन


बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट को ऑक्सीजन सप्लाय लाइन से जोड़ने के बाद इसकी टेस्टिंग कराना होगी। जिस एजेंसी को यह काम सौंपा जाएगा उसके टेक्निशियन यूनिट में आएंगे-जाएंगे। लाइन जुड़ने के बाद एक बार फिर यूनिट का फ्यूमिगेशन कराना होगा। फिलहाल भी यूनिट में टेक्निशियनों का आना-जाना लगा रहता है। यही वजह है कि कल्चर रिपोर्ट लगातार पॉजीटिव आ रही है। जब तक रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आएगी यहां ट्रांसप्लांट शुरू नहीं हो सकेंगे।


पूरे दिन बंद रखना होगी सप्लाई


बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट को ऑक्सीजन लाइन से जोड़ने के लिए पूरे अस्पताल की ऑक्सीजन सप्लाय बंद करना होगी। इसे तय करने के लिए एक कमेटी भी बनी थी, लेकिन उसकी बैठक नहीं हुई। ऑक्सीजन सप्लाय बंद करने से पहले पर्याप्त मात्रा में अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर रखना होंगे। ताकि किसी अप्रिय स्थिति को टाला जा सके।


दूसरी जगह बनना थी यूनिट


बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट अस्पताल की चौथी मंजिल पर बनी है। इसके आसपास के वार्डों में गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं। मरीज अकसर इन वार्डों के बाहर भी घूमते रहते हैं। इससे संक्रमण फैलता रहता है। यही वजह है कि यूनिट की कल्चर रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आ पा रही। विशेषज्ञों का कहना है कि यूनिट को अस्पताल की मेन बिल्डिंग में बनाने के बजाय इसके लिए नई बिल्डिंग बनाई जाना थी।