लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय यूपी इन्वेस्टर्स समिट-2018 में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि लखनऊ से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज टीसीएस का नाता टूटने नहीं जा रहा है. टीसीएस राजधानी में अपनी सर्विसेज जारी रखेगी. यही नहीं अब टीसीएस यहां अपनी स्थिति और मजबूत करेगी. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी क्षेत्रों में चौतरफा विकास के लिए हम सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे. एन चंद्रशेखरन ने कहा कि उत्तर प्रदेश में टीसीएस की उपस्थिति है. टाटा मोटर्स यहां है. हमारे खुदरा कंपनियों की यहां एक महत्वपूर्ण उपस्थिति है. हम पूरे क्षेत्रों में यूपी के विकास में भाग लेने के लिए प्रतिबद्ध हैं.


दरअसल पिछले साल जुलाई में खबर आई कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विस ने राजधानी लखनऊ में अपने दफ्तर को बंद करने की तैयारी कर ली है. कर्मियों को मौखिक तौर पर बंदी का आदेश सुना दिया गया है, इस निर्णय से यहां काम कर रहे करीब 2000 पेशेवरों पर रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया. इस फरमान के बाद टीसीएस लखनऊ के आईटी प्रोफेशनल्स ने ट्विटर पर गुपचुप तरीके से एक अभियान भी छेड़ा. इस मामले में खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि टीसीएस को वह लखनऊ से नहीं जाने देंगे.


क्या है मामला

टीसीएस लखनऊ को उत्तर प्रदेश में आईटी प्रोफेशनल्स का सबसे बड़ा हब माना जाता है. बताया गया कि लखनऊ में कंपनी चलाने में आर्थिक नुकसान काफी हो रहा है इसलिए ये कदम उठाया जा रहा है. दरअसल टीसीएस की अवध पार्क की 10 साल की लीज 2017 के मई में खत्म हो गई. पता चला कि ये लीज 11 महीने के लिए रिन्यू की गई है. कंपनी के ऊपर पार्क में लीज पर बिल्डिंग का किराया चार गुना बढ़ाने का दबाव है. जिसे लेकर कंपनी तैयार नहीं है.



 

टीसीएस की लखनऊ में शुरुआत 1987 में विधानसभा मार्ग स्थित तुलसी गंगा कांप्लेक्स से हुई थी. इसके बाद 1988 में राणा प्रताप मार्ग पर कंपनी का दफ्तर शिफ्ट हुआ, फिर 2008 में स्टेशन रोड पर दफ्तर शिफ्ट हुआ. इसके बाद 200 से ज्यादा कर्मचारी हो जाने पर कंपनी ने विभूति खंड स्थित अवध टीसीएस पार्क में शिफ्ट कर लिया था.