राजस्थान विधानसभा में प्रेत आत्माओं का साया है और इसी वजह से कभी भी 200 विधायक एक साथ सदन में नहीं रहे. यह हम नहीं कह रहे हैं, सरकारी मुख्य सचेतक कह रहे हैं. सरकारी मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर ने खुलकर कहा है कि विधानसभा अपशकुनी है, विधानसभा में आत्माएं घूम रही हैं.


इस अपशकुन से छुटकारा पाने को अब मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से अनुष्ठान करवाने के लिए कहा गया है. सीएम की मंजूरी के बाद आत्माओं और गृहों की शांति के लिए विधानसभा में अनुष्ठान और भोज करवाया जाएगा.


गुर्जर ने कहा, विधानसभा में कभी भी 200 विधायक एक साथ नहीं रहे, कुछ न कुछ होता रहता है, यह सब आत्माओं की वजह से है. विधानसभा श्मसान और कब्रिस्तान की जमीन पर बनी है, बिना विधि विधान विधानसभा भवन चालू हुआ जिसकी वजह से कुछ न कुछ होता रहता है और इसी वजह से कभी भी 200 विधायक एक साथ यहां नहीं रहे.


पिछले साल अगस्त में मांडलगढ़ से बीजेपी विधायक कीर्ति कुमारी का स्वायन फ्लू से निधन हुआ, इसके सात माह बाद ही कल बीजेपी विधायक कल्याण सिंह चौहान का कैंसर की वजह से निधन हो गया. यह संयोग है लेकिन बीजेपी विधायक इससे खौफ में जरूर है.कभी पूरा नहीं हुआ 200 का आंकड़ा


राजस्थान विधानसभा का नया भवन 1999 में बनकर तैयार हुआ, लेकिन विधानसभा भवन के निर्माण के दौरान ही करीब आधा दर्जन मजदूर अलग अलग कारणों से काल का ग्रास बन गए. साल 2000 में इसमें नियमित बैठकें शुरू हो गईं. विधानसभा के नए भवन मेेंं शिफ्ट होने के बाद एक संयोग जुड़ गया कि किसी न किसी कारण से पूरे 200 विधायक कभी एक साथ नहीं बैठे. या तो विधायक के लोकसभा चुनाव जीतकर सासंद बन जाने से सीट खाली हुई या किसी विधायक की मौत का कारण रहा कि 200 का आंकड़ा कभी पूरा ही नहीं हुआ.


साल 2000 में गहलोत सरकार में मंत्री और सागवाड़ा से विधायक भीखा भाई भील का निधन हुआ, इसी साल लूणकरणसर से विधायक भीमसैन चौधरी का निधन हुआ.


2003 से 2008 के बीजेपी सरकार के कार्यकाल में भी यह संयोग जारी रहा. 2004 में लूणी से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री रामसिंह बिश्नोई का निधन हुआ, 2005 मेें डीग से बीजेपी विधायक अरुण सिंह का निधन हो गया और इन दोनों जगह उपचुनाव हुआ.


साल 2008 से 2013 में 13 वीं विधानसभा के दौरान किसी मौजूदा विधायक का निधन नहीं हुआ लेकिन चार विधायकों के जेल जाने से सदन में विधायकों की संख्या फिर कम हो हुई. दिसंबर 2011 में मंत्री रहते हुए महिपाल मदेरणा और विधायक मलखान बिश्नोई भवरी देवी हत्या प्रकरण में जेल चले गए, दारिया एनकाउंटर मामले में बीजेपी विधायक राजेंंद्र राठौड़ भी कुछ समय जेल में रहे और बाद में दुष्कर्म मामले में 2013 मेंं तत्कालीन मंत्री बाबूलाल नागर को जेल हो गई.


14 वीं विधानसभा मेें भी यह संयोग जारी रहा, धौलपुर से बसपा विधायक बीएल कुशवाह चुनाव जीतने के तत्काल बाद हत्या के मामले में जेल चले गए, बाद में कुशवाह को सजा होने से उनकी सदस्यता चली गई. धौलपुर में अप्रैल 2017 में उपचुनाव में शोभारानी कुशवाह जीती, अगस्त में मांडलगढ़ विधायक कीर्ति कुमारी का निधन हो गया, मांडलगढ उपचुनाव में ​कांग्रेस के विवकेक धाकड़ जीते, उपचुनाव के महीने भर से पहले ही नाथद्वारा विधायक कल्याण सिंह का निधन हो गया.



विधानसभा के सदन में 200 विधायकों की संख्या पूरा नहीं होने का यह संयोग अब तक जारी है. इसी संयोग ने बीजेपी विधायकों को सकते में डाल दिया है. इस डर की वजह से ही अब विधानसभा भवन में प्रेतात्माओं की शांति की बात कही जा रही है. हालांकि संविधान की शपथ लेने वाले विधायकों के इन तर्कों को न विज्ञान मानता है, न संविधान.