फूलपुर लोकसभा सीट के लिए 11 मार्च को होने वाले उपचुनाव में सरगर्मियां तेज हो गई हैं. कभी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की परंपरागत सीट रही फूलपुर में सपा, कांग्रेस और बीजेपी के साथ ही पूर्व सांसद बाहुबली अतीक अहमद के निर्दलीय चुनाव मैदान में कूदने की वजह से इस सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है. देवरिया जेल में बंद बाहुबली नेता अतीक अहमद के नामांकन के बाद अब तक के सारे कयास और सियासी समीकरण उलटे पड़ गए हैं. खासकर समाजवादी पार्टी का सियासी समीकरण जरुर गड़बड़ा गया है.


डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई फूलपुर लोकसभा सीट पर 11 मार्च को मतदान होना है. हांलाकि इसके पहले नामांकन के साथ ही चुनावी बिसात भी बिछ चुकी है. सपा, कांग्रेस और बीजेपी समेत कुल 24 प्रत्याशी चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे हैं. लेकिन इस सीट पर एक ऐसा भी प्रत्याशी चुनाव मैदान में है, जिसके आ जाने से चुनावी समीकरण ही बदल गए हैं. फूलपुर लोकसभा सीट से ही 2004 में सपा के टिकट पर जीत दर्ज कर संसद पहुंचे बाहुबली अतीक अहमद ने इस बार सपा से बगावत का बिगुल फूंकते हुए निर्दलीय पर्चा भरा है. अतीक अहमद के चुनाव मैदान में उतरने से सबसे ज्यादा मुश्किल में खुद सपा ही है. हांलाकि सपा प्रत्याशी नागेन्द्र सिंह पटेल अतीक के आने से किसी भी मुश्किल से इनकार कर रहे हैं.नागेन्द्र सिंह पटेल कहते हैं, “ अतीक अहमद इस सीट से हमारे सांसद रह चुके हैं. हम उनका सम्मान करते हैं. मुस्लिम मतदाता अखिलेश यादव के साथ हैं, निश्चित रूप से उनका समर्थन मिलेगा. अतीक अहमद से कोई नुकसान नहीं होगा. जनता ही निर्णय करेगी. वह बीजेपी के झूठे वादे से नाराज है.”



जबकि सच्चाई यह है कि अतीक अहमद के चुनाव मैदान में आने के बाद उपचुनाव में सारे सियासी समीकरण उलट गए हैं. फूलपुर लोकसभा सीट पर करीब सवा दो लाख मुस्लिम मतदाता है. अतीक के नामांकन दाखिल करने से सबसे ज्यादा असहज समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता हैं, क्योंकि उनकी चुनावी गणित मुस्लिम-यादव और पटेल मतदाताओं पर आधारित थी. मुस्लिम और यादव मतदाताओं की स्वाभाविक पसंद होने के अलावा क्षेत्र में बड़ी संख्या में पटेल मतदाताओं के होने की वजह से पार्टी ने नागेन्द्र प्रताप सिंह पटेल पर दांव लगाया है. लेकिन अगर कुछ मुस्लिम मतदाता अतीक के खेमे में चले गए तो पटेल, अन्य पिछड़े और कुर्मी मतदाता बीजेपी के कौशलेन्द्र सिंह पटेल को वोट और सपोर्ट दे सकते हैं.


दूसरी तरफ उपचुनाव में कांग्रेस ने मनीष मिश्रा के रूप में ब्राह्मण प्रत्याशी पर दांव लगाया है. हांलाकि इस चुनाव में बीजेपी की स्थिति 2014 लोकसभा चुनाव जैसी नहीं है. लिहाजा अब तक सपा प्रत्याशी नागेंद्र सिंह पटेल सबसे मजबूत प्रत्याशी दिख रहे थे. लेकिन अतीक के चुनाव मैदान में आने के बाद सपा और कांग्रेस के खेमों में बौखलाहट देखी जा रही है. अतीक को जितने वोट मिलेंगे उतना फायदा बीजेपी को होगा और इसका सीधा नुकसान सपा और कांग्रेस को होगा. अतीक के चुनाव मैदान में आने से बीजेपी के नेता अंदर से खुश तो हैं, लेकिन वे इसे जाहिर नहीं कर रहे हैं.


फूलपुर लोकसभा सीट पर जातीय समीकरण


फूलपुर लोकसभा सीट पर कुल 19 लाख 59 हज़ार मतदाता हैं. इनमें दलित मतदाता 5 लाख 55 हजार, ओबीसी मतदाता 7 लाख 50 हजार, मुस्लिम मतदाता 2 लाख 25 हजार, अगड़ी जातियों के मतदाता 4 लाख 50 हजार. सवर्णों में सबसे अधिक करीब डेढ़ लाख ब्राह्मण मतदाता हैं.


योगी सरकार के मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह कहते हैं अतीक अहमद के आने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. जनता मन बना चुकी है और पार्टी यहां जीत दर्ज करेगी.बहरहाल, फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में बाहुबली पूर्व सपा सांसद अतीक अहमद की एंट्री होने से फूलपुर सीट को लेकर जहां सियासी दलों की धड़कने तेज हो गई हैं. वहीं अब वोटों के ध्रुवीकरण को लेकर भी पार्टियां जोर अजमाइश में लग गई हैं. हांलाकि प्रत्याशी के नामांकन वापसी के बाद ही फूलपुर लोकसभा सीट को लेकर वास्तविक तस्वीर सामने आएगी. शुक्रवार 3 बजे तक नाम वापसी होना है. उसके बाद चुनाव योग सभी प्रत्याशियों को सिंबल बांटेगा.