नई दिल्ली केंद्र सरकार लोकपाल की नियुक्ति की तैयारी में है. सूत्रों का कहना है कि सरकार ने लोकपाल की नियुक्ति को लेकर सेलेक्शन कमेटी की बैठक 1 मार्च को बुलाई है. पंजाब नेशनल बैंक (PNB) महाघोटाले को लेकर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है. विपक्ष 5 मार्च से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए कमर कस चुका है.


मगर विपक्ष के हमले की धार को कुंद करने और भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त छवि को बरकरार रखने के लिए मोदी सरकार भी एक्शन में आ गई है. सरकार की कोशिश है कि वह संसद में विपक्ष के आरोपों पर बचाव की बजाए आक्रामक दिखे.


इसके लिए संसद सत्र के शुरू होने के चार दिन पहले ही सरकार ने लोकपाल के चयन समिति की बैठक बुलाई है ताकि लोकपाल के नाम पर सहमति बनाई जा सके. ये बैठक 1 मार्च को शाम 5 बजे प्रधानमंत्री आवास पर बुलाई गई है. साथ ही विपक्ष के हमले का जवाब देने के लिए बीजेपी अपने सांसदों को भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी से भी लैस करेगी.


लोकपाल की सेलेक्शन कमिटी में पीएम मोदी, लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन, देश के मुख्य न्यायधीश और लोकसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हैं.


कांग्रेस के निशाने पर मोदी सरकार


कांग्रेस लोकपाल की नियुक्ति में देरी के बहाने मोदी सरकार पर सवाल उठाती रही है. कुछ ही दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर मोदी सरकार पर लोकपाल को लेकर निशाना साधा था. राहुल गांधी ने लोकपाल का जिक्र करते हुए ट्वीट किया था कि 'चार साल बीत गए हैं ये लोकतंत्र के हिमायती और जिम्मेदारियों से दूर रहने वाले लोग लोकपाल की अनदेखी पर आखिर चुप क्यों हैं?'


राहुल ने इस मुद्दे पर सरकार से सवाल किया था कि आखिर केंद्र सरकार राज्यों में लोकपाल की नियुक्ति क्यों नहीं कर रही. उन्होंने ट्वीट किया था, 'कहते थे देंगे जवाबदेह सरकार, किया लोकपाल क्यों दरकिनार? GSPC, बिजली-मेट्रो घोटाले, शाह-जादा पर चुप्पी हर बार, मित्रों की जेब भरने को हैं बेकरार, लंबी है लिस्ट और 'मौनसाहब' से है जवाब की दरकार, किसके अच्छे दिन के लिए बनाई सरकार?'