इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राइमरी स्कूल बरेली के प्रधानाचार्य के खिलाफ जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई न करने पर बेसिक शिक्षा सचिव से 2 हफ्ते में स्पष्टीकरण मांगा है और पीड़ित सहायक अध्यापिका का एक हफ्ते में बरेली से मेरठ तबादला करने का निर्देश दिया है. प्रधानाचार्य पर सहायक अध्यापिका की साढ़े 3 साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ करने का आरोप है. एफआईआर दर्ज है.


मामले में उप बेसिक शिक्षा अधिकारी की जांच में प्रधानाचार्य को दोषी पाते हुए अध्यापिका के तबादले की संस्तुति की गई है. याची की अर्जी के बावजूद तबादला नहीं किया गया. कोर्ट ने राज्य सरकार से कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से सुरक्षा कानून 2013 व सुप्रीम कोर्ट के विशाखा केस की गाइडलाइन का पालन न करने पर 2 हफ्ते में जवाब मांगा है. याचिका की सुनवाई 22 मार्च को होगी.


यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने पीड़िता की याचिका पर दिया है. याची ने कहा कि 18 जुलाई 2017 को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं व पास्को एक्ट के तहत बरेली में प्रधानाचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. विभागीय शिकायत कर मामले की जांच करने व उसका पति व ससुर के गृह जनपद मेरठ तबादला करने की मांग की है. याची का कहना है कि उसे धमकाया जा रहा है. उसकी जान को खतरा है. इसके बावजूद अधिकारियों ने उसका तबादला नहीं किया. उसकी बच्ची का शोषण किया गया, वहीं उसे रहने के लिए विवश कर उसके सम्मानपूर्ण जीवन के अधिकारों का हनन किया जा रहा है.


कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विशाखा केस के निर्देशों की अवहेलना करने पर नाराजगी जाहिर की है और कहा है कि जिन अधिकारियों ने शिकायत पर कार्यवाही करने में लापरवाही बरती उन पर कार्यवाही की जाय. साथ ही पीड़िता की सुरक्षा के कदम उठाने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार से महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा नीति तय करने का आदेश दिया है. साथ ही जांच रिपोर्ट के बाद पीड़िता का तबादला न करने का स्पष्टीकरण मांगा है.