राज्य सरकार की ओर से बजट घोषणा में प्रदेशभर के लघु और सीमांत किसानों को राहत देने के लिए 50 हजार रु तक का ऋण माफ करने घोषणा तो कर दी गई.लेकिन, बूंदी जिले की सहकारी बैंकों में इस घोषणा के बाद अब तक  ऋण माफी की गाइडलान नहीं पहुंची है. इसके अभाव में बैंक प्रबंधन द्वारा ऋण वसूली के लिए दवाब बनाए जाने से जिले के हजारों किसान परेशान हो रहे हैं.


जिले की सहकारी बैंको से कर्ज लेने वाले 44,328 किसानों ने 50 हजार रुपए तक का लोन लिया हुआ है. ऋण जमा करवाने की अंतिम तारीख 31 मार्च के नजदीक आ जाने के कारण सहकारी बैंको के प्रबंधन ने ऋण वसूलने के लिए किसानों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है. इसी को लेकर किसान भी दुविधा में हैं. अगर निश्चित तारीख तक लोन नहीं चुकाया जाएगा तो किसान डिफॉल्टर की श्रेणी में आ जाएंगे.


बैंक प्रबंधन किसानों के ऋण माफी की घोषणा के सबंध में गाइडलाइन नहीं आने के कारण बकायादारों को ऋण वसूली का नोटिस भेज रहा है. बूंदी सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक  मोहन लाल जाट ने कहा कि जिले के 44,328 किसानों  1 करोड़ 71 लाख रुपए का लोन लिया हुआ है. इनके साथ ही डिफॉल्टर किसानों पर 17 लाख रुपए से ज्यादा का कर्ज बकाया है.


अगर समय पर कर्ज माफी की गाइडलाइन नहीं मिली तो बैंक का एनपीए बढ़ जाएगा. दूसरी तरफ किसानों का कहना है कि घोषणा के बाद हुई लेटलतीफी के चलते वे परेशान हो रहे हैं.