• देश में एक के बाद एक घट रही दुष्कर्म की जघन्य घटनाएं जो रूकने का नाम नहीं ले रही। बच्चियों के साथ दुष्कर्म से बड़ा जघन्य पाप और अपराध इस पृथ्वी म़े और कुछ भी नहीं है। फाँसी से भी कोई बड़ी सजा हो तो वो भी इस अपराध की सजा के लिए तुच्छ है।
  • आरोपी को अपराधी साबित करने से लेकर सजा दिलाने तक की कानूनी प्रक्रिया इतनी दुरूह है कि मुकदमा लड़ते-लड़ते सामान्य आदमी का धैर्य जवाब दे जाता है। पुलिस की विवेचना रसूख और धन से प्रभावित हो जाती ह़ैं। प्रभावशाली छूट जाते हैं और कितने निर्दोष जेल में सडते रह जाते ह़ै।
  • दुष्कर्म और हत्या जैसे जघन्यतम मामलों में सुप्रीम कोर्ट से भी फांसी की सजा बरकरार रहने के बावजूद भी कई नराधम राक्षस  फाँसी के फंदे से लटकने से बच गए ऐसी भी विचित्र व्यवस्था हमारे देश में है।
  • राष्ट्रपति पद से निवृत्त होते होते प्रतिभा देवीसिंह ताई पटिल ने 2012 में ऐसे ही 35 दुर्दांत अपराधियों की फांसी माफ कर दी थी। जिनमें 30 बलात्कार व हत्या के अपराधी थे। इनमें से एक प्रकरण मध्यप्रदेश के रीवा जिले का था। दो अपराधियों मोलई कोल और संतोष यादव की फाँसी माफ कर दी गई जो एक स्कूली छात्रा की बलात्कार के बाद नृशंस हत्या के अपराध म़े़ं सुनाई गई थी। यह प्रकरण नवीना हत्याकांड के नाम से जाना गया। स्कूली छात्रा नवीना जेलर की बेटी थी। मोलई जेल का प्रहरी व संतोष कैदी जिसे बाहर के काम के लिए छूट मिली थी। दोनों ने जेलर के बंगले म़ें अकेली बच्ची के साथ दुष्कर्म किया फिर सब्जी काटने वाले चाकू से उसका पेट चीरकर लैट्रिन टैंक म़े़ं डाल दिया। चौबीस घंटे के भीतर दोनों पकड़े गए। सत्रन्यायालय ने फाँसी की सजा सुनाई, सुप्रीमकोर्ट ने बहाल रखी। पर महामहिम प्रतिभा पाटिल ने इन्हें माफी देदी।

 
आज स्थिति यह कि देश में ऐसी घटनाओं की बाढ़ सी आई है। क्या गांव, क्या कस्बे कश्मीर से कन्याकुमारी तक ये राक्षसी दौर चल रहा है। चर्चाओं में एक हजार में एक ही ऐसी घटनाएं आ पाती हैं। पचास फीसद घटनाएं तो थाने तक नहीं पहुंच पातीं। जो पहुंच पाती हैं उनमें से नब्बे फीसदी की विवेचना इतनी लचर होती है कि अपराधी छूट जाते हैं।
 
निर्भया केस के बाद ऐसे मामले में अपराध कानूनों को सख्त बनाने व बलात्कारी साबित होने पर अधिकतम सजा फाँसी देने की बातें की गई। कई विधि विशेषग्यों, व समाजशास्त्रियों ने ये अंदेशा जताया था कि कानून का भय पैदा करने से समस्या और विकट हो जाएगी। जो अभागिनें बलात्कार के बाद कैसे भी बच जाया करती थीं वे अब जान से मार दी जाया करेंगी। निर्भया केस के बाद से यही ट्रैन्ड बढा है। ज्यादातर मामले में शिकार हुई युवतियां  मार दी जाती हैं।