रूसी सैन्य निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंध से भारत के साथ होने वाली करीब 39,822 करोड़ रुपये की डील को झटका लग सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से एशिया के आसपास के अन्य अमेरिकी सहयोगियों की हथियारों की खरीद पर ब्रेक लग सकता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा साइन किए गए एक कानून के मुताबिक, रूस के डिफेंस और इंटेलिजेंस सेक्टर में व्यापार करने वाले किसी भी देश को इस प्रतिबंध का सामना करना पड़ेगा। यह कानून रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन को सजा देने के लिए लाया गया है। रूस पर 2014 में क्रिमिया पर कब्जा करने, सीरिया के गृहयुद्ध में शामिल होने और अमेरिका के 2016 के चुनाव में दखल देने का आरोप है। अब इस फैसले के बाद रूस से हथियार खरीदने वाले अमेरिका के सहयोगी देशों को परेशानी हो सकती है। बता दें कि रूस दुनिया दूसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक है। इस झटके का सबसे ताजा उदाहरण भारत है। भारत रूस से 5 लंबी रेंज के सर्फेस टु एयर मिसाइल सिस्टम S-400 खरीदना चाहता है। भारतीय सेना के मुताबिक, यह सिस्टम सेना के लिए गेम चेंजर हो सकता है। 


इस खरीद से जुड़े दो अधिकारियों ने दिल्ली में बताया कि 2016 में इंटर-गवर्नमेंट समझौते के रूप में राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो सौदा किया था, वह सौदा अमेरिकी प्रतिबंध कानून की वजह से टल सकता है। अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगी होने के बावजूद इंडोनेशिया और वियतनाम भी रूस से हथियार खरीदते हैं। हाल ही में जकार्ता ने रूस से सुखोई फाइटर्स की बड़ी डील की है। वहीं वियतनाम रूस से जेट फाइटर्स बॉम्बर्स खरीदने की तैयारी कर रहा है। 


हाल ही में रूस के सहयोगी देश सीरिया में अमेरिका की एयरस्ट्राइक के बाद दोनों सुपर पावर के बीच टेंशन और बढ़ गई है। भारत के साथ होने वाली S-400 डील से जुड़े रूसी सूत्र ने बताया, 'बहुत कुछ हमारे भारतीय भागीदारों के आत्मविश्वास और स्वच्छता पर निर्भर करेगा।'