ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाई जाती है। इस बार शनि अमावस्या 15 मई, मंगलवार को है। इस दिन पर शनिदेव की पूजा करने पर शनि भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है, इसलिए इस दिन देश के शनि मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ती है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग की भी निष्पत्ति हो रही है।

मंगलवार को अमावस्या होने के कारण शनि जयंती का महत्व और अधिक बढ़ गया है। भौमवती अमावस्या मंगलवार को होने के कारण महंगाई बढ़ेगी साथ ही प्राकृतिक आपदा से जन धन की हानि संभावित है। साथ ही अपराध में वृद्धि के संकेत मिल रहे हैं।

शनि जयंती के साथ अमावस्या का शुभ संयोग, अंगारक योग, शनि की साढ़े साती, विष योग, ग्रहण दोष एवं पितृ दोष की शांति के लिए विशेष शुभ फलकारी रहेगा। आइए जानते हैं शनिदेव की पूजा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन पर नहीं पड़ती है शनि की पीड़ा का असर।

जो भक्त हमेशा शनिवार के दिन हनुमानजी के दर्शन और उनकी पूजा करता है शनिदेव कभी भी अपनी खराब दृष्टि उन भक्तों पर नहीं डालते हैं।

शनि की पूजा करने के लिए सूर्योदय से पहले शरीर पर तेल की मालिश करके स्नान करना चाहिए। शनि अमावस्या के दिन अगर संभव हो सके तो अपनी यात्रा को टाल देना चाहिए।

शनिदेव अपने पिता सूर्यदेव से बैर रखते है इसलिए संभव हो इस दिन सूर्यदेव की पूजा नहीं करना चाहिए। शनि पूजा के दिन ब्रह्राचर्य का पालन करना चाहिए और काली वस्तुओं का दान करना चाहिए।

जब भी शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर के दर्शन करें तो इस बात का ध्यान रखें कि उनकी आंखों में आंख डाल कर उन्हें न देखें। हमेशा शनिदेव के चरणों के दर्शन करना चाहिए।

शनिवार और शनि अमावस्या के दिन गरीबों और असहायों की सेवा करना चाहिए। साथ उन्हें कुछ दान देना शुभ माना जाता है।