वाशिंगटन। दुनिया में पहली बार एक रोबोट की मदद से मरीज की गरदन से बेहद जटिल कैंसर ट्यूमर निकालने में कामयाबी मिली है। अमेरिका की पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी में इस ऑपरेशन को भारतवंशी सर्जन नील मेहरोत्रा के नेतृत्व में अंजाम दिया गया।


नोआ पेर्निकाफ नामक जिस मरीज की गरदन से ट्यूमर निकाला गया, उसकी उम्र महज 27 साल है। एक कार हादसे के बाद इलाज के दौरान हुई जांच में इस खतरनाक ट्यूमर का पता चला।


नोआ तीन चरणों वाली रोबोटिक सर्जरी कराने वाले दुनिया के पहले मरीज बन गए हैं। इस जटिल ट्यूमर को कोरोडोमा कहते हैं। यह खोपड़ी और रीढ़ की हड्डी के बीच में होता है। कोरोडोमा ट्यूमर आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है और अक्सर कई साल तक इसके लक्षण सामने नहीं आ पाते।


कार दुर्घटना में नोआ के कंधों और रीढ़ की हड्डियों में मामूली चोटें आई थीं। हादसे से उबरने के बाद बायोप्सी के दौरान पता चला कि उन्हें जटिल ट्यूमर कोरोडोमा है।


नील मेहरोत्रा की अगुआई वाली टीम ने तय किया कि नोआ का ऑपरेशन ट्रांस ओरल रोबोटिक (टॉर्स) की मदद से होगा। टॉर्स दुनिया की पहली ऐसी रोबोटिक प्रणाली है, जिससे सर्जरी के दौरान खतरे बेहद कम रहते हैं।