जयपुर विशेष पिछड़ा वर्ग में 5 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर एक बार फिर गुर्जर 23 मई को भरतपुर के पीलूपुरा में एकत्रित होंगे. यह वही जगह है जहां 2008 में आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में 16 लोग मारे गए थे. बयाना के अड्‌डा गांव में मंगलवार हो हुई गुर्जर महापंचायत में कर्नल बैसला ने इस बात की पुष्टि की है कि वो इस महापंचायत के जरिए सरकार को संदेश दे चुके हैं. यदि आगामी सात दिनों में भी सरकार कोई कदम नहीं उठाती है तो वे फिर से वही रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे. 23 मई को पीलूपुरा में आंदोलन की आगे की रूपरेखा तैयार होगी.

गुर्जर आरक्षण आंदोलन में अब तक 72 की मौत

एक दशक से अधिक समय से आरक्षण की मांग पर अब तक कई बार गुर्जर सड़कों पर उतर चुके हैं. 2007 और 2008 में आंदोलन उग्र हुआ और उस दौरान पुलिस फायरिंग में दर्जनों लोग मारे गए थे. 29 मई, 2007 को आंदोलन के दौरा पाटोली में पुलिस ने भीड़ पर फायरिंग की और इसमें 26 लोग मारे गए. इसके बाद अगले ही साल 23 मई में पीलूपुरा में भी ऐसा ही हुआ. पुलिस फायरिंग में 16 लोगों की जान गई और अगले दिन 24 मई 2008 को सिकंदरा में पुलिस फायरिंग ने 21 लोगों की जान ले ली.

कब-कब गई 72 जानें

29 मई, 2007 : पाटोली में पुलिस फायरिंग,26 लोग मारे गए

23 मई, 2008 : पीलूपुरा में पुलिस फायरिंग, 16 लोग मारे गए

24 मई, 2008 : सिकंदरा में पुलिस फायरिंग, 21 लोग मारे गए

अब तक 145 करोड़ का हो चुका है नुकसान

सरकारी आंकड़ों के अनुसार गुर्जर आरक्षण की वजह से अब तक 145 करोड़ रुपए की सरकारी संपत्तियों और राजस्व का नुकसान हो चुका है. वहीं आमजन और उससे जुड़े प्रतिष्ठानों को पहुंचाए गए नुकसान का आंकलन भी 13 हजार 500 करोड़ रुपए से अधिक लगाया गया है. आंदोलन के पहले साल यानि 2007 में नुकसान 4.5 हजार करोड़ और 2008 में 9 हजार करोड़ रुपए का नुकसान माना गया. हाईकोर्ट में पेश हलफानामें के अनुसार भरतपुर में 35 करोड़, दौसा में 45 करोड़, सवाई माधोपुर में 11 करोड़, अलवर में 8 करोड़, टोंक में 8 करोड़, कोटा में 5 करोड़, बूंदी में 11 करोड़, भीलवाड़ा में 3 करोड़, अजमेर में 2 करोड़ और झुंझुनूं में 1 करोड़ रुपए की सरकारी संपत्तियों का नुकसान हुआ. इसके अतिरिक्त अन्य जिलों में नुकसान 15 करोड़ रुपए से अधिक आंका गया.