एक्सर्साइज़ के बारे में तो सब जानते हैं कि तन को स्‍वस्‍थ और मन को खुश रखती है। मगर वर्कआउट करते-करते सेक्‍स का आनंद मिले तो भला कौन नहीं करना चाहेगा एक्सर्साइज़। जानिए कैसे ...

कई स्‍टडीज में बताया गया है कि एक्सर्साइज़ ऑर्गेज्‍म वाकई में काम करता है। सेक्‍शुअल एंड रिलेशन थेरपी में बताया गया है कि एक्सर्साइज़ के वक्‍त ऑर्गेज्‍म फील होना सामान्‍य प्रक्रिया है। इस स्‍टडी में 530 महिलाओं पर सर्वे किया गया । इनमें से 46 फीसद महिलाओं को एक्सर्साइज़ के वक्‍त ऑर्गेज्‍म फील हुआ।

ऐसा जरूरी नहीं है कि आपको एक्सर्साइज़ के दौरान हर बार ऑर्गेज्‍म फील हो। ऐसा हमेशा नहीं हो सकता। ऐसा कुछ ही एक्सर्साइज़ में होता है। विशेषकर पेल्विक और अब्‍डोमन रीजन से जुड़ी एक्सर्साइज़। इनमें सिट-अप, साइकिलिंग या फिर पेल्विक रीजन से जुड़ी कोई और भी एक्सर्साइज़ हो सकती है।

सेक्‍शुअल ऑर्गेज्‍म जहां 3 से 20 तक रहता है। वहीं एक्सर्साइज़ ऑर्गेज्‍म कुछेक सेकंड के लिए ही फील हो पाता है। मगर उतनी देर का ऑर्गेज्‍म आपके मूड को फ्रेश कर देता है।

शोधकर्ताओं के लिए यह अभी भी सवाल बना हुआ है कि आखिर एक्सर्साइज़ के वक्‍त क्‍यों ऑर्गेज्‍म फील होता है। एक्‍सपर्ट बताते हैं कि ऐसा पेल्विक रीजन की मसल्‍स सिकुड़ने के कारण हो सकता है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को य‍ह ऑर्गेज्‍म अधिक फील होता है।

यह जरूरी नहीं है कि एक्सर्साइज़ के दौरान पुरुषों को इरेक्‍शन हो। हालांकि इजेक्‍यूलेशन की संभावना ज्‍यादा रहती है। अगर इस वक्‍त किसी पुरुष को इरेक्‍शन होता भी है तो यह सेक्‍स की तुलना में काफी कम होगा।