कोटा में बाल कल्याण समिति का इम्मानुअल संस्था पर शिंकजा लगातार कसता जा रहा है. न्यायालय के आदेश के बाद शनिवार को समिति अध्यक्ष हरीश गुरुबक्षाणी चाइल्ड लाइन और उद्योग नगर थाना पुलिस को साथ लेकर संस्था के रायपुरा स्थित जीवन आशा छात्रावास पहुंचे. वहां छात्रावास में रह रहे 62 छात्रों और 17 बालकिओं के दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की.


संस्था ने न्यायालय में 700 बच्चे होने की बात बताई थी, लेकिन मौके पर मात्र 79 बालक-बालिकाएं मिले हैं. अन्य बच्चों के बारे में संस्था के दस्तावेजों की पड़ताल की गई. वहीं समिति के सदस्यों ने छात्रावास में व्यवस्थाएं देखी तो वह भी नियमों के अनुरूप नहीं मिली. इसको देखते हुए और न्यायालय के आदेश की पालना करते हुए सभी बच्चों को दूसरे शेल्टर होम में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया. चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने सभी बच्चों के कागज तैयार किए और फिर समिति अध्यक्ष ने इन्हें अलग-अलग शेल्टर होम में भेजने के आदेश दिए.


समिति अध्यक्ष हरीश गुरुबक्षाणी के अनुसार संस्था द्वारा अवैध रूप से बाहर के बच्चों को रखने की शिकायत लगातार मिल रही थी. इस कारण से न्यायालय ने समिति को 15 दिनों में इस संस्था में रह रहे बच्चों की जांच करके रिपोर्ट पेश करने को कहा है. लेकिन संस्थान के सदस्य जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और कई अनियमितताएं बरती जा रही हैं. इसको देखते हुए सभी बच्चों को दूसरे शेल्टर होम में शिफ्ट किया गया है. वहीं संस्था के सदस्य समिति पर मनमानी करने का आरोप जड़ रहे हैं.