उसे रेप बोलने में हिचक हो रही थी...बार-बार सिर्फ़ इतना ही कहती "पापा 'ग़लत काम' करते थे. मना करने पर मारते थे...कहते हमसे जुबान लड़ाएगी..."

लेकिन उसे रेप के मायने पता हैं. टूटे-फूटे शब्दों में ही सही वो बताती है कि उसके साथ क्या-क्या होता था. वो कमरा भी दिखाती है जहां उसे ज़मीन पर पटक दिया जाता था. दर्द से वो चिल्लाती थी तो एक बड़ा-सा हाथ उसके चेहरे को दबा देता था.

इसी कमरे में बैठकर वो क्राइम पेट्रोल देखा करती थी, ऐसी बहुत-सी कहानियां उसने देख रखी थीं, लेकिन एक कहानी उसके अंदर भी चल रही थी...पर मार के डर से उसने ये कहानी कभी किसी को नहीं सुनाई.

पायल एक साल पहले अपनी सगी मां को छोड़कर छोटे भाई के साथ हरियाणा के एक छोटे से गांव में रहने आई थी. बिहार से हरियाणा आने तक उसे इस बात का सुकून था कि अब वो अपने पिता की ज़िम्मेदारी है, उसे अच्छी परवरिश मिलेगी.


पायल के पिता भुवन की दो पत्नियां हैं. पहली पत्नी गूंगी है और अब अपने एक बेटे के साथ मायके में रहती है. पहले पायल और उसका भाई भी सगी मां के साथ ही थे. लेकिन जब उन्हें बोझ समझा जाने लगा तो भुवन उन्हें अपने साथ लेता आया.


यहां पहले से भुवन का एक परिवार था. दूसरी पत्नी सुजाता और उसके दो बच्चे थे. लेकिन पायल और बलराम को कभी ऐसा नहीं लगा कि वो अपनी सौतेली मां के साथ हैं.

सुजाता के बालों को हाथ से समेटते हुए पायल कहती है, "मम्मी तो बहुत अच्छी है. पापा मारते थे. मम्मी को भी और हमको भी. रोज़ शराब पीकर आते थे और मम्मी को मारते थे, लेकिन मम्मी अच्छी हैं."

सुजाता बताती हैं, "ये मेरे गांव आया करता था. इसकी रिश्तेदारी है वहां. मैं इससे प्यार करने लगी और फिर शादी कर ली."


सुजाता का दावा है कि उन्हें भुवन की पहली शादी के बारे में कुछ भी नहीं पता था. भुवन ने कभी भी इस बात का ज़िक्र उनसे नहीं किया था.


"मैं तो जब शादी करके पहुंची तब पता चला कि इसकी शादी हो रखी है और बालक भी हैं. लेकिन मैं तो उसे अपना सबकुछ दे चुकी थी तो चुप हो गई. सब सह लिया."

सुजाता कहती हैं कि 'सच्चाई सामने आने के बाद मेरे मां-बाप पंचायत में आए थे, लेकिन भुवन ने कहा कि उसने दोनों औरतों के सिर में सिंदूर डाला है तो दोनों की ज़िम्मेदारी उठाएगा.'


भुवन, सुजाता को लेकर क़रीब दो साल पहले हरियाणा के इस गांव में रहने आया था. यहां वो सीमेंट की पाइप बनाने का काम करता है, वहीं सुजाता घरों में साफ़-सफ़ाई का काम करती हैं.


सुजाता कहती हैं, 'पायल की मम्मी और मेरी कभी लड़ाई नहीं होती. जब हम लोग गांव जाते हैं तो वो मिलने भी आती है.'

ये सुनकर पायल सबसे पहले मार का ज़िक्र करती है.


"जब हम लोग गांव में थे तो पापा कभी नहीं मारते थे. लेकिन यहां आने के बाद से रोज़-रोज़... (चार साल, पांच साल और दस साल के छोटे भाई-बहनों की ओर इशारा करते हुए) इन सबको तो डांट देते थे, इतने में ये सब कोना पकड़ लेते थे."

सुजाता बीच में ही बोलती हैं, "बहुत मारता था, पैसा छीन लेता था. इसलिए हम एक-दो घर में उसे बिना बताए काम करते थे. उसको पता नहीं था कि मेरे पास कितना घर का काम है. अस्पताल से 5500 रुपया मिलता था तो हम उसको 5000 ही बताए थे."


सुजाता सुबह 9-10 बजे के आस-पास काम के लिए निकलती हैं और शाम को 7 बजे तक आती हैं.


घरों में काम निपटाने के बाद वो अस्पताल चली जाती हैं, लेकिन उस दिन जल्दी छुट्टी हो गई.

"16 मई को हम 12 बजे के आस-पास घर आ गए. तीनों बच्चे एक कमरे में थे और दूसरी कोठरी का दरवाज़ा आधा बंद-आधा खुला था. धक्का देकर जब अंदर गए तो दोनों अपना-अपना कपड़ा ठीक करने लगे. हम पायल को पूछे कि ये सब गंदा काम कब से हो रहा है तो वो बताई कि पापा मार का डर दिखाकर बहुत दिन से ऐसा कर रहे हैं."


सुजाता का दावा है कि इसके बाद उनके पति ने उन्हें धमकाया और वहां से भाग गए. उसके बाद वो ख़ुद भी दो दिन तक अपने घर नहीं रहीं.


"उसने हमको मारने की धमकी दी जिसके बाद हम एक घर में चले गए जहां काम करते हैं. दो दिन तक वहीं रहे. उसके बाद 100 नंबर पर पुलिस को सब बता दिया."

18 तारीख़ को सुजाता ने पुलिस को इस बारे में सूचित किया जिसके बाद भुवन को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस की एक टीम ने पायल का मेडिकल कराया, बयान लिया और काउंसलिंग कराई.


मामले से संबंधित महिला थाने की एसएचओ पूनम सिंह ने बताया कि भुवन ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है और उस पर पॉक्सो क़ानून के तहत मामला दर्ज़ किया गया है. मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि हुई है.


गुड़गांव की एसीपी शकुन्तला ने भी इस बात की पुष्टि की है.

आंचल फैलाकर कहने लगी "उनको बचा लो. क्या वो कभी जेल से बाहर नहीं आएगा? उनसे ग़लती हुई है पर अब वो ऐसा नहीं करेगा. बचा लो...मैंने एक बेटी का सोचकर ये सब कर दिया पर तीन बालक और भी तो हैं...कौन देखेगा हम लोगों को."


" ससुराल वाले हमको ही बुरा कह रहे हैं. कोई नहीं है मेरे लिए."


और पायल?


"हमको स्कूल भिजवा दो...हम पढ़ना चाहते हैं. गांव में चार तक पढ़े हैं. पढ़वा दो और मम्मी जो कह रही है वही."

इतना बोलकर वो पानी पीने के लिए चली गई. दरवाज़े के पास रखा पानी का घड़ा ढका हुआ नहीं था. वो उसमें से पानी निकालकर पीती है और इशारे से फ़र्श को दिखाती है...फिर बाहर पड़ी चारपाई पर जाकर लेट जाती है.


बिना सवाल पूछे वो खुद से कहती है, "अब इस कमरे में डर नहीं लगता, क्यों लगेगा, पापा तो चला गया"


एक बेटी जब पिता की गैर-मौजूदगी को इस तरह से बयां करे तो समझ आ जाता है कि उसके भीतर कितना कुछ टूट चुका है.