गंगा दशहरा का हिंदू धर्म में खास महत्व है। इस दिन दूर-दूर से श्रद्धालु गंगा तट का रुख करते हैं। इसे क्यों मनाते हैं यह जानने से पहले यह जानें कि गंगा दशहरा पर गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व है। यदि गंगा तट तक जाना संभव न हो तो घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद पूजा-पाठ और दान करें। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान का कई गुना पुण्य मिलता है। चलिए अब जानते हैं इस पर्व को मनाने का कारण…


इस कारण मनाते हैं यह त्योहार

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा दशहरा पर्व मनाया जाता है। पुराणों के अनुसार, पूर्वाह्ण – व्यापिनी ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र कालीन स्वर्ग से गंगा नदी का धरती पर अवतरण हुआ था। धरती पर बढ़ रहे पापों का नाश करने के लिए पतित पावनी गंगा भागीरथ के तप से धरती पर आईं। धरती गंगा के प्रवाह के तेज वेग को सह नहीं पाती इसलिए भगवान शिव ने गंगा के वेग को कम करने के लिए पहले उसे अपनी जटाओं में धारण किया।


करें इन वस्तुओं का दान

आज के दिन अन्न और वस्त्रों का दान करने की परंपरा है। यह दिन पितृ तर्पण, जप-तप, उपासना-उपवास के लिए श्रेष्ठ है। इस बार यह तिथि अधिकमास में पड़ रही है इसलिए इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। अगली बार यह संयोग 3 साल बाद ही आ पाएगा। इसलिए इस पुण्य कमाने के इस पावन मुहूर्त का पूरा लाभ उठाएं।