राजस्थान में भीषण गर्मी का दौर शुरू होने के साथ ही पानी की जबर्दस्त मारामारी शुरू हो गई है. राज्य में कहीं दो दिन, तो कहीं तीन दिनों में पानी आने वाले स्थानों पर जलदाय विभाग टैंकरों पर आपूर्ति करने में जुटा है. ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की रीढ़ कहे जाने वाले हैडपंपों को सुधारने के लिए अभियान चलाया जा रहा है. ट्यूबवेल की खराब मोटरें बदली जा रही हैं. जरूरत के हिसाब से नए ट्यूबवैल और हैडपंप स्वीकृत किए जा रहे हैं. खराब पड़े संसाधनों को सुधारने के लिए जलदाय विभाग अतिरिक्त लेबर और संसाधन झौंक रहा है, लेकिन फिर भी पार नहीं पड़ रही है.


- ​अभी 12 कस्बों में 332 टैंकर्स के जरिये पानी का परिवहन हो रहा है

- ​379 गांव-ढाणियों में 195 टैंकर्स के जरिये पानी पहुंचाया जा रहा है.

- ​ग्रामीण क्षेत्र में जल परिवहन के लिये 24 करोड़ स्वीकृत.



- ​शहरी क्षेत्र में पानी के टैंकरों के लिये 22 करोड़ की राशि स्वीकृत.

- ​424 थ्री फेज और 279 सिंगल फेज ट्यूबवेल के बिजली कनेक्शन अभी पेंडिंग

- ​स्टाफ की कमी की पूर्ति के लिए 2500 कॉन्ट्रेक्ट लेबर स्वीकृत

- ​1 अप्रैल तक प्रदेश में 1536 हैण्डपम्प थे खराब

(सभी आंकड़े 31 मार्च तक के)



जलदाय विभाग कर रहा है मशक्कत

अभी 12 कस्बों में 332 टैंकर्स के जरिये पानी का परिवहन हो रहा है. वहीं 379 गांव-ढाणियों में 195 टैंकर्स के जरिये पानी पहुंचाया जा रहा है. ग्रामीण क्षेत्र में जल परिवहन के लिये 24 करोड़ और शहरी क्षेत्र में पानी के टैंकरों के लिये 22 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है. शहरी क्षेत्रों में इस राशि से 117 कस्बों में पानी का बंदोबस्त किया जायेगा. जिन क्षेत्रों में प्रदूषित पानी की शिकायत थी वहां नई पाइप लाइनें स्वीकृत की है. प्रदेश में एक अप्रैल से हैण्डपम्प रिपेयर अभियान की शुरुआत की गई है.


30 मार्च तक प्रदेश में 2 लाख 28 हजार 384 हैण्डपम्पों की मरम्मत की जा चुकी है. फिर भी 1 अप्रैल तक प्रदेश में 1536 हैण्डपम्प खराब हालत में थे. 30 मार्च तक 4815 हैण्डपम्प, 1983 ट्यूबवेल और 388 सिंगल फेज ट्यूबवेल नये लगाये जा चुके हैं. 424 थ्री फेज और 279 सिंगल फेज ट्यूबवेल के बिजली कनेक्शन अभी पेंडिंग हैं. उनको बिजली से जोड़ने का काम चल रहा है. आवश्यकतानुसार नए ट्यूबवेल फरवरी में ही स्वीकृत कर दिए गए हैं.


जलसंकट से निपटने के लिए झौंके संसाधन

जलदाय विभाग ने जल संकट से मुकाबला करने के लिए अपने आप को पूरी तरह से झौंक दिया है. इसके तहत विभाग की प्राथमिकता खराब पड़े हैडपंप और अन्य संसाधनों को सुधारना है, ताकि ग्रामीण इलाकों को राहत मिल सके. इसके लिए किराये की 531 जीपें स्वीकृत की गई हैं. वहीं स्टाफ की कमी की पूर्ति के लिए 2500 कॉन्ट्रेक्ट लेबर स्वीकृत किये गये हैं. सबसे ज्यादा जोधपुर रीजन के लिये 972 कॉन्ट्रेक्ट लेबर स्वीकृत की गई है.


यह पश्चिमी राजस्थान का वो हिस्सा है जहां पानी की मारामारी ज्यादा रहती है. वहीं अजमेर रीजन में 225, भरतपुर रीजन में 184, बीकानेर रीजन में 216 लेबर स्वीकृत किए गए हैं. जयपुर रीजन में 420, कोटा रीजन में 221 और उदयपुर रीजन में 262 लेबर स्वीकृत की गई है. प्रत्येक सहायक अभियन्ता को किराये की जीप और कर्मचारी उपलब्ध करवाया गया है.